शुल्क में बढ़ोतरी के बाद अब निजी स्कूलों ने किताबों को लूट का जरिया बना दिया है। इसके विरोध में मंगलवार को अभिभावकों ने आवाज मुखर की।
मंगलवार की सुबह दून इंटरनेशनल स्कूल में किताबें बिकने की खबर मिलते ही डीएवी पीजी कॉलेज के छात्रों ने हंगामा कर दिया। डीएवी के छात्रों ने स्कूल में मनमाने दाम पर बेची जा रही किताबों पर रोष जताया। उन्होंने फीस बढ़ाने को लेकर भी नाराजगी जताई।
इस दौरान अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। जवाब में स्कूल प्रबंधन ने कहा कि छात्रों की सहूलियत के लिए फीस बढ़ाई गई है। प्रदर्शनकारियों और प्रबंधन के बीच वार्ता बेनतीजा होने के कारण डीएवी के छात्र धरने पर बैठ गए।
शहर के सेंट जोजफ स्कूल में भी युवा सेना ने हंगामा किया। सेना के कार्यकर्ताओं ने गेट पर धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने प्रधानाचार्य के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर 24 का अल्टीमेटम दिया है।
इसके साथ ही पब्लिक स्कूलों की मनमानी और सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को लेकर शिक्षा जनसंघर्ष अभियान के तहत विभिन्न संगठनों ने शिक्षा मंत्री के आवास पर धरना दिया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आवास में जाने से रोका तो गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री आवास के गेट पर ताला लगा दिया और मंत्री के लापता होने के पर्चा चस्पा कर दिया। बाद में पुलिस द्वारा ताला तोड़ दिया गया।
एनसीईआरटी की किताबों को दरकिनार कर निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबों की सूची थमा देते हैं। खास बात यह है कि इन किताबों के दाम में गत वर्ष के मुकाबले बीस प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई है। अभिभावकों से हो रही इस लूट का हिस्सा कमीशन के तौर पर स्कूल प्रबंधन को भी मिलता है।
निजी स्कूल प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें अपने स्कूल में लगवाने के एवज में 40 प्रतिशत तक कमीशन खाते हैं। मसलन, जिस किताब को अभिभावक बाजार से 100 रुपए में खरीद रहे हैं, उसमें से 40 रुपए सीधे स्कूल के खाते में जाते हैं। इस खेल में भी अभिभावक जमकर लूटे जा रहे हैं।
एक बुक सेलर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस साल प्राइवेट किताबों के दामों में 15 से 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। कक्षा पांच की जो किताब गत वर्ष 100 रुपए की थी, इस साल उसका मूल्य 120 पर पहुंच गया है। कक्षा आठ तक 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जबकि कक्षा नौ से 12वीं तक की किताबों के दामों में भी 30 से 50 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है।
फीस में बढ़ोतरी कोई मनमानी नहीं
निजी स्कूलों की मनमानी पर भले अभिभावक और कई संगठन एकजुट हो गए हों, लेकिन प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव एसोसिएशन का मानना है कि फीस में बढ़ोतरी को मनमानी कहना गलत है। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप तो पैरेंट्स एसोसिएशन को बरसाती मेंढक कहते हैं।
साथ ही उनकी यह चेतावनी भी है कि विरोध इसी तरह जारी रहे तो स्कूल बंद कर दिए जाएंगे। इसका खामियाजा बच्चों, अभिभावकों को उठाना होगा। अमर उजाला ने कश्यप से फोन पर बातचीत की। पेश हैं कुछ अंश:
सवाल: स्कूलों की मनमानी बढ़ रही है। शुल्क में भी मनमानी बढ़ोतरी की जा रही है?
जवाब: देखिए, स्कूल में हमारे बच्चे तो पढ़ते नहीं। दूसरे लोगों के बच्चे हमारे यहां आते हैं। हम उनके विकास की जिम्मेदारी उठाते हैं। फीस बढ़ोतरी को मनमानी मत कहिए, यह बिल्कुल सही है। हम इसका पूरा समर्थन करते हैं।
सवाल: समर्थन, मतलब आप इस मनमानी को बढ़ावा दे रहे हैं?
जवाब: जी नहीं, कोई कंपनी अगर अपने उत्पाद के रेट बढ़ा दे तो सब चुप रहते हैं लेकिन हम शुल्क बढ़ा दें तो आप चिल्लाने लगते हैं। अभिभावकों की जितनी भी एसोसिएशन और संगठन बने हुए हैं, सब बरसाती मेंढक हैं। सब अपने स्वार्थ के लिए आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। जब इनकी ‘कमाई’ और दाखिले हो जाते हैं तो सब चुप हो जाते हैं।
सवाल: लेकिन कंपनी तो कंपनी एक्ट से चलती है, टैक्स देती है। स्कूल की सोसाइटी नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार पर चलती है, जो टैक्स भी नहीं देते। तो कंपनी से कैसे तुलना की जा सकती है?
जवाब: देखिए, हम सिर्फ इतना जानते हैं कि अगर सरकार ने पहल करके हमें संरक्षण न दिया तो एक दिन सारे स्कूल बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद जो होगा, उसे सरकार खुद संभाले। इस बात का ख्याल जरूर रखें कि अगर स्कूल बंद कर दिए तो अंत में नुकसान बच्चों का ही होगा।
सवाल: तो मनमानी से संबंधित मामलों पर आपकी एसोसिएशन कोई कदम उठाएगी?
जवाब: अभी मैं एक मीटिंग में हूं। बाद में बात करूंगा।