देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी अब वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की तर्ज पर कोर्स शुरू करने की तैयारी में है। अगले सत्र से पीयू के कुछ विभागों में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स पीजी-पीएचडी शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए वीरवार को कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर, डीयूआई, रजिस्ट्रार और सभी विभागाध्यक्ष शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) के तहत सभी राज्यों को करीब 120 करोड़ की राशि केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्रालय की ओर से दी जाएगी। इस पैसे को पाने के लिए इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने जरूरी है।
पीयू 2 साल के ग्रेजुएशन और 3 साल के पीएचडी कोर्स को मिलाकर इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिन डिपार्टमेंट में इंटीग्रेटेड कोर्स चल रहे हैं, वहां इसे शुरू किया जाएगा।
पीयू कुलपति ने इस मामले में अगले महीने तक सभी विभागाध्यक्षों को रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। इस मामले में पीयू शिक्षकों से एक फीडबैक फार्म भी देने को कहा गया है।
एसोसिएट और प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति की तैयारी
पीयू में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद पर कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैश) प्रमोशन में यूजीसी की ओर से तैयार पेम्फलेट लागू करने और उसमें संशोधन करने का मामला भी बैठक में उठा।
कुलपति ने नियमों के रिव्यू के लिए कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। इसके अलावा पीयू प्रशासन जल्द ही एसोसिएट और प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति की तैयारी कर रहा है।
असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति के लिए विज्ञापन अब राष्ट्रीय रोजगार अखबार के भी अगले अंक में प्रकाशित होगा। कुलपति का मानना है कि इन पदों की पब्लिसिटी से पीयू को काबिल शिक्षक मिल सकेंगे।
पीयू को जल्द मिलेंगे 110 करोड़
पंजाब यूनिवर्सिटी को यूजीसी से जल्द ही बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है। तीन दिन पहले ही पीयू कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर और कुछ अन्य अधिकारी पीयू बजट को लेकर यूजीसी दिल्ली गए थे।
सूत्रों के अनुसार कुलपति ने यूजीसी के सामने 110 करोड़ बजट की मांग की है। इसमें पीयू शिक्षकों की सैलरी आदि भी शामिल है। प्रो. कुलपति ने कहा कि बैठक काफी सकारात्मक हुई है और जल्द ही इसका नतीजा भी देखने को मिलेगा।