पंजाब यूनिवर्सिटी में दो करोड़ रुपये से अधिक के गबन मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें कई और अधिकारियों की संदिग्ध संलिप्तता सामने आ रही है।
पुलिस की ताजा जांच में पीयू के दो पूर्व ऑडिटरों के नाम सामने आए हैं। मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा ने पूर्व ऑडिटर अशोक गोयल और कृष्ण लाल शर्मा को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। उनसे सोमवार को पूछताछ की जाएगी।
वहीं, वीरवार को पूजा बग्गा की रिमांड अवधि समाप्त होने पर उसे जिला अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने बग्गा से मामले में अन्य अधिकारियों से कन्फ्रंट करवाने और उससे पूछताछ करने के लिए रिमांड अवधि छह दिन और बढ़ाने की अपील की। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट ने पुलिस की दलीलें सुनने के बाद पूजा की रिमांड दो दिन के लिए बढ़ा दिया।
वीरवार को जांच अधिकारी ने पुलिस को बताया कि बुधवार को निलंबित सुपरिंटेंडेंट नरेश सभ्रवाल को उसके आफिस ले जाया गया था। वहां उसकी पीयू फाइनेंस डेवलपमेंट आफिसर (एफडीओ) के सामने कुछ अधिकारियों से बातचीत करवाई गई। इसके बाद इस मामले में कुछ और अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं।
उनसे आगे पूछताछ की जा सकती है। जरूरत पड़ी तो उनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी। साथ ही पता चला है कि पीयू के पेंशन सेल का काफी रिकार्ड खुला पड़ा है, जिसका ऑडिटरों ने ऑडिट किया था। इस रिकार्ड के बारे में केवल ऑडिर्ट्स ही बता सकते हैं।
पुलिस के अनुसार पिछले दो वर्षों में जब ये गबन हुआ है, उस वक्त के ऑडिटरों को सेवानिवृति के बाद रिअप्वाइंट किया गया था और इन दो वर्षों में ही गबन सामने आया है। साथ ही पुलिस ने अदालत को बताया कि पूजा बग्गा और नरेश सभ्रवाल का आमना-सामना करवाया गया था। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर गबन के आरोप लगाए।
नरेश सभ्रवाल ने पूछताछ में कबूला है कि कैश बुक एक अन्य सुपरिंटेंडेंट मोहिंद्र सिंह ने रिबांइड की थी। दोनों का कन्फ्रंट भी करवाया गया, लेकिन मोहिंद्र सिंह ने आरोपों से इंकार किया है।
जांच में यह सामने आया कि चेक के जरिए गबन किया गया था। पुलिस को अब यह पता करना है कि कैसे एफडीओ ने चेक पर दस्तखत किए, जबकि वाउचर्स पर रकम अलग थी।