यूटी प्रशासन की ओर से सरकारी कालेजों में कांट्रेक्ट पर नियुक्त किए गए शिक्षकों को नियमित करने के प्रस्ताव को रद कर दिया गया है।
प्रशासन के उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कालेजों में कांट्रेक्ट पर काम कर रहे 300 से ज्यादा शिक्षकों को नियमित करने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा था जिसे रद कर दिया गया। कालेजों में कांट्रेक्ट पर रखे गए शिक्षक लगभग चार साल पहले मेरिट पर चयनित हुए थे और प्रशासन ने शिक्षकों की भरती की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया था।
यह शिक्षक चार साल से लगातार बिना किसी ब्रेक के काम कर रहे हैं और प्रशासन से लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें नियमित कर दिया जाए।
ध्यान रहे कि चार साल पहले तक हर साल सरकारी कालेजों में कांट्रेक्ट पर शिक्षक नियुक्त होते थे, लेकिन कैट के निर्देश के बाद अब पिछले चार सालों से यह शिक्षक काम कर रहे हैं। उन्हें अब शिक्षा सत्र के समाप्त होने पर रिलीव नहीं किया जाता है।
शहर के सरकारी कालेजों में शिक्षकों के करीब 300 पद खाली हैं। शहर के सरकारी कालेजों में लगभग सात सालों से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है और इन खाली पदों पर कांट्रेक्ट पर शिक्षक नियुक्त हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन के लंबे संघर्ष के बाद कालेजों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पिछले साल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंजूरी दी थी और यूपीएससी ने जून, 2013 में चंडीगढ़ के पांच सरकारी कालेजों में 39 शिक्षकों की भरती के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांग थे।
हालाकि अभी तक यूपीएससी ने इस पदों के लिए इंटरव्यू नहीं लिए हैं। पहले चरण में 39 शिक्षकों की नियुक्ति के बाद यूपीएससी की ओर से दूसरे चरण में 40 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाने थे। लेकिन, 40 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी आवेदन अभी तक नहीं मंगवाए गए हैं।
यूपीएससी की ओर से कालेजों में अंग्रेजी के पांच, भूगोल के पांच, हिंदी के तीन, कामर्स के दो, मनोविज्ञान का एक, लोक प्रशासन के एक, राजनीति शास्त्र के दो, फिजिक्स और कैमिस्ट्री के एक एक, हिस्ट्री के एक, डांस के दो और फिजिक्ल एजुकेशन के एक शिक्षक की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे।