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उत्तराखंड में अटकी प्राइवेट परीक्षाओं की गाड़ी

Fri, 25 Sep 2015 01:45 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में प्राइवेट परीक्षाओं के बदलाव की गाड़ी अटक गई है। राजभवन में हुई बैठक में सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। लिहाजा इस साल श्रीदेव सुमन विवि और कुमाऊं विवि के पास ही जिम्मेदारी रह सकती है। दूसरी ओर, उत्तराखंड मुक्त विवि से भी नए सिरे से प्रस्ताव मांगा गया है।
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गुरुवार को राजभवन में राज्यपाल डॉ. के के पाल ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और मुख्य सचिव सहित सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्राइवेट परीक्षाओं की जिम्मेदारी श्रीदेव सुमन विवि और कुमाऊं विवि से लेकर उत्तराखंड मुक्त विवि को देने पर चर्चा उठी।

सूत्रों के मुताबिक इस मसले पर कुमाऊं विवि का तर्क था कि अगर उनसे प्राइवेट परीक्षा की जिम्मेदारी ली जाती है तो विवि को अलग से वित्तीय सहायता दी जाए। लिहाजा प्रमुख सचिव एम. रामास्वामी ने कहा कि इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने के लिए दिसंबर तक का समय दिया जाए। राज्यपाल ने इस पर सहमति दे दी।
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सूत्रों के मुताबिक इस बदलाव के लिए उत्तराखंड मुक्त विवि को दोबारा प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। दिसंबर तक मामला टलने के बाद अब इस साल गढ़वाल मंडल में श्रीदेव सुमन विवि और कुमाऊं मंडल में कुमाऊं विवि के पास ही प्राइवेट परीक्षाओं की जिम्मेदारी रहने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

रेटिंग में आएं प्रदेश के विवि
राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने कुलपतियों की बैठक लेते हुए कहा कि उन्हें बदलते वैश्विक परिवेश के हिसाब से पाठ्यक्रमों में बदलाव कर गुणवत्तायुक्त शिक्षा से विश्व स्तर की रेटिंग में आने की जरूरत है।

उन्होंने राज्य के युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए विवि की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि देश-विदेश के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों की तरह हमें भी लगातार बदलते वैश्विक वातावरण के अनुकूल अपने संस्थानों को ढालने के प्रयास करने होंगे। विवि नियमित रूप से दीक्षांत समारोह का आयोजन कर समय पर छात्रों को डिग्री प्रदान करें।

कॉलेजों की संबद्धता से जुड़े मामलों का भी शीघ्रता से निस्तारण किया जाए। एफि लिएशन कमेटी में दक्ष व सक्षम लोगों को स्थान दिया जाए। विश्वविद्यालयों में अधिक से अधिक उपयोगी व्यावसायिक कोर्स संचालित किए जाएं। विश्वविद्यालयों में प्लेसमेंट सेल स्थापित करने तथा बड़े संस्थानों में छात्रों को सेवायोजित करने की पहल करने के भी निर्देश राज्यपाल ने दिए।

उन्होंने पीएचडी व थीसिस के पंजीकरण में भी योग्यता व विशिष्टता का ध्यान रखने को कहा। बैठक में मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव एस. रामास्वामी, ओम प्रकाश, राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं सचिव अरूण कुमार ढ़ौडियाल, सचिव आरके सुधांशु, अमित नेगी, अपर सचिव विनोद रतूड़ी, दून विवि के कुलपति प्रो. वीके जैन, पंतनगर विवि के कुलपति प्रो. मंगला राय, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, औद्यानिकी एवं वानिकी विवि के कुलपति प्रो. मैथ्यू प्रसाद, श्री देव सुमन व हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत, मुक्त विवि के कुलपति प्रो. सुभाष धूलिया, संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. महावीर प्रसाद, आयुर्वेद विवि कुलपति प्रो. एसपी मिश्रा, तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग मौजूद रहे।
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