अच्छे इंजीनियर-डॉक्टर बनाने के साथ ही सीबीएसई अब बच्चों को हर तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहा है।
इसके लिए बोर्ड ने प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट (पीएसए) शुरू किया है। नौवीं से लेकर 12वीं तक विद्यार्थियों को यह टेस्ट दो बार देना है। इसका प्रश्नपत्र खुद सीबीएसई की ओर से स्कूलों को भेजा जाता है।
विद्यार्थियों, अभिभावकों से लेकर स्कूलों के शिक्षक और प्रबंधक तक को सीबीएसई की यह नई व्यवस्था ने प्रभावित किया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की तर्कशक्ति और संवाद क्षमता के विकास के लिए यह बेहतर तरीका है।
इसके जरिए विद्यार्थियों को इंटर के बाद अपनी फील्ड चुनने में आसानी होगी। सीबीएसई ने यह नई व्यवस्था पिछले साल लागू की थी। पिछले साल विद्यार्थियों ने पहली बार नौवीं और 11वीं में पीएसए टेस्ट दिया था।
पिछले साल जो ये टेस्ट नहीं दे पाए या फिर जिनके अंक कम थे, उन्हें इस साल इंप्रूवमेंट का मौका दिया गया। हाल ही में 18 जनवरी को हुई इस परीक्षा और इसमें पूछे गए सवालों से सभी काफी प्रभावित हैं।
विद्यार्थियों और अभिभावकों के अलावा स्कूलों को भी यह नई व्यवस्था काफी रास आई। वे इसमें रोचक ढंग से पूछे गए सवालों से भी काफी खुश हैं। हाल ही में इंप्रूवमेंट परीक्षा देनी वाली कनिका बताती हैं कि बहुत अच्छा लगा।
कई मजेदार सवाल थे। सवाल बहुत कठिन भी नहीं थे लेकिन सामान्य परीक्षाओं से हटकर थे। नौवीं की परीक्षा देने वाली पूजा भी कहती हैं कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छी तैयारी हो जाएगी।
आशियाना में रहने वाले अभिभावक दिनेश शर्मा कहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को तैयार करने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता।
आमतौर पर इंटर के बाद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग से पढ़ना या कोचिंग करनी होती है लेकिन अब स्कूल में ही यह तैयारी हो जाएगी।