चंद रुपयों के लिए आटो और स्कूली वैन संचालक वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस का बैठा रहे हैं। वहीं बिना परमिट के चल रहे इन वाहनों के प्रति परिवहन विभाग भी आंख बंद कर बैठा है, जिससे बच्चों को खतरा बना रहता है।
परिवहन विभाग की ओर से राजधानी में एक भी स्कूल वैन का परमिट नहीं है, लेकिन सवा सौ स्कूल वैनों का इस काम के लिए संचालित होना परिवहन विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा स्कूलों में करीब दो सौ आटो भी संचालित किए जा रहे हैं, जो मानकों से अधिक बच्चों को बैठाते हैं। इसमें न सिर्फ आमजन बल्कि तमाम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी सवार होते हैं। शायद यही कारण है कि जान बूझकर जिम्मेदार अधिकारी इससे अंजान बने रहते हैं।
यह है लालच
एक आटो में अगर निर्धारित छह बच्चे ढोए जाएंगे तो संचालक को करीब 6,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। लेकिन 15 बच्चे भरने पर यह कमाई दो गुना से ज्यादा होती है। वैन में भी 10 बच्चे ढोने पर 10,000 रुपये महीना की कमाई आती है। बीस बच्चे ढोने पर कमाई दो गुनी हो जाती है।
यह हैं मानक
स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहन का आरटीओ में स्कूल वाहन में पंजीकरण हो
बच्चों की संख्या बढ़ाने के फेर में वाहन की सीट में कोई परिवर्तन न किया गया हो
वाहन के शीशों पर बारीक तार वाला सुरक्षा जाल लगा हो
स्कूल वाहन पीले रंग का हो और उस पर नीली पट्टी हो
वाहन में फायर कंट्रोल के लिए सिलेंडर लगा हो
वाहन चालक और अटेंडर ड्रेस में हो
वाहनों में निर्धारित संख्या से ज्यादा बच्चे नहीं बैठाया जाए
सीट के नीचे और वाहन के ऊपर स्कूल बैग रखने की व्यवस्था हो