लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी अब पीएचडी करवा सकेंगे।
लविवि के कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने यह घोषणा कॉलेज डवलपमेंट काउंसिल (सीडीसी) की पहली बैठक में की।
उन्होंने कहा कि यूजीसी के नियमों को पूरा करने वाले शिक्षकों को पीएचडी करवाने की छूट दी जाएगी।
वहीं, कॉलेजों में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा जिसका चेयरमैन लविवि का कोई प्रोफेसर होगा।
इसके अलावा कॉलेजों के तीन टीचर प्रकोष्ठ के सदस्य होंगे जो रोटेशन के आधार पर कुलपति द्वारा नामित किए जाएंगे। इसके अलावा इसमें कॉलेजों में सबसे मेधावी छात्रों को भी शामिल किया जाएगा।
शिकायत निवारण प्रकोष्ठ का कार्यकाल दो वर्षों का होगा और यहां आने वाली शिकायतों को 10 दिन में ही निपटाना होगा।
कुलपति डॉ. निमसे ने सलाह दी कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों को कॉलेजों और कॉलेजों के शिक्षकों को विश्वविद्यालय में आकर पढ़ाना चाहिए। इससे ज्ञान का बेहतर आदान-प्रदान होगा और पढ़ाई का अच्छा माहौल बनेगा।
लविवि के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि सभी कॉलेजों को लविवि की तर्ज पर कल्चरल एक्टिविटी बोर्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में सीडीसी के डीन प्रो. एके सेनगुप्ता ने बताया कि सीडीसी कॉलेज की एकेडमिक गाइड की तरह काम करेगी।