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UP बोर्ड: आखिर कौन्ा होगा इस लापरवाही का जिम्मेदार

Tue, 24 Sep 2013 08:41 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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राजधानी के यूपी बोर्ड की नौंवी व ग्यारहवीं कक्षाओं के छात्रों के ऑनलाइन पंजीकरण में लापरवाही बरती जा रही है।
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आवेदन के लिए अंतिम सप्ताह बचा है। इसके बावजूद 221 स्कूलों ने अभी तक ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की है। 62 स्कूल तो लॉगिन करने के बाद भी प्रक्रिया को लटकाए पड़े हैं। अब तक केवल 30 हजार छात्र-छात्राओं का पंजीकरण हो सका है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नौंवी व ग्यारहवीं के छात्रों का ऑनलाइन पंजीकरण कराने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य था कि इससे फर्जी पंजीकरण और शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।
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लेकिन पंजीकरण में स्कूलों की लापरवाही विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। बीते वर्ष तक राजधानी में करीब एक लाख 20 हजार छात्रों के नौंवी व ग्यारहवीं में पंजीकरण हुए थे। वर्तमान सत्र में तो ये स्थिति काफी खराब हो चुकी है।
बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया 12 अगस्त से एक अक्टूबर तक की जानी है। समय सीमा समाप्त होने में एक सप्ताह का समय बचा है लेकिन अब तक केवल 30 हजार विद्यार्थियों के पंजीकरण हुए हैं।

अब तक जमा नहीं हुए फॉर्म
लापरवाही का हाल यह है कि 118 स्कूलों ने अब तक अपने रजिस्ट्रेशन फार्म तक जमा नहीं किए हैं। सहायक डीआईओएस जेके वर्मा ने बताया कि अगर स्कूलों ने 25 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन फार्म नहीं जमा किए तो उनको नोटिस जारी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर के बाद बच्चों के रजिस्ट्रेशन फार्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में लेटलतीफी के पीछे फर्जी पंजीकरण और शिक्षा माफिया के सिंडीकेट का हाथ माना जा रहा है।

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र कहते हैं कि अभी तक ऑनलाइन पंजीकरण न करने वालों में तमाम ऐसे स्कूल हैं जो फर्जी पंजीकरण कराने के दोषी पाए गए हैं।

इनकी जांच की जाए तो शिक्षा माफिया का बड़ा खेल सामने आएगा। कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां कुल 10 कमरे हैं। लेकिन यहां से नौंवी व ग्यारहवीं में दो-दो हजार छात्र-छात्राओं के पंजीकरण फार्म प्राप्त हुए हैं।
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पंजीकरण संख्या हो जाएगी शून्य राजधानी में नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा में निर्धारित तिथि एक अक्टूबर तक ऑनलाइन पंजीकरण न कराने वाले कॉलेजों की छात्र संख्या इस सत्र में शून्य मानी जाएगी। इसके लिए खुद विद्यालय प्रबंधक उत्तरदायी होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
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