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गजबः 77 साल में MA तो 69 की उम्र में कर रहे BA

Thu, 10 Sep 2015 04:14 PM IST
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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महान शिक्षाविद् और पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का यह वाक्य उन पर फिट बैठता है, जो बुजुर्ग होने के बाद भी पढ़ने-लिखने और ज्ञानार्जन की ललक दिखा रहे हैं।
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इन दिनों उत्तराखंड ओपन यूनविर्सिटी (यूओयू) से कोटद्वार में परीक्षा दे रहे 77 साल के योगानंद पांथ्री और ऋषिकेश में परीक्षा दे रहीं 69 साल की शारदा देवी जैसे कई परीक्षार्थी साबित कर रहे हैं कि पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती है। साथ ही वे उन युवाओं के लिए संदेश दे रहे हैं जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के परीक्षा नियंत्रक प्रो. पीडी पंत के मुताबिक अलग-अलग विषय में पिछले साल 25000 के मुकाबले इस बार 27292 छात्र-छात्राएं यूओयू के विभिन्न केंद्रों पर इम्तहान दे रहे हैं। उनमें 1938 में जन्मे कोटद्वार निवासी योगानंद पांथ्री भी शामिल हैं जो मनोविज्ञान से एमए कर रहे हैं।
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हालांकि, उनका उद्देश्य डिग्री लेकर कहीं नौकरी हासिल करना नहीं है, बल्कि ज्ञान प्राप्त करना है। उन्हीं की तरह 69 वर्ष की शारदा देवी ऋषिकेश में योगा नैचुरोपैथी में बैचलर डिग्री के लिए परीक्षा दे रही हैं। योगानंद और शारदा ही नहीं, बल्कि 60-70 आयु वर्ग में प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर अलग-अलग स्ट्रीम के 37 बुजुर्ग परीक्षार्थी जज्बा दिखा रहे हैं।
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उम्रदराज लोगों का रुझान कौतुक भरा

यूओयू से दूरस्थ शिक्षा के प्रति ज्यादातर नौकरी-पेशा वर्ग का ही रुझान होता है, लेकिनघर बैठे पढ़ाई करने की सुविधा मिलने के बाद कई बुजुर्ग परीक्षार्थियों का डिग्रीधारी बनने का सपना इस सत्र में पूरा होने वाला है। इस सत्र में योगानंद यूओयू के सबसे उम्रदराज पोस्ट ग्रेजुएट होंगे।

बताते हैं कि परीक्षा हॉल में उन्हें देख बाकी परीक्षार्थियों का हौसला बढ़ जाता है। योगानंद की तरह ही 1947 से पहले जन्मे नौ छात्र इस बार उत्तराखंड मुक्त विवि की परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं, जबकि 56-60 आयु वर्ग के 206 परीक्षार्थी इस बार इम्तहान दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा समेत अन्य प्रदेशों से भी कई परीक्षार्थी भी उत्तराखंड परीक्षा देने आए हैं।

प्रो. पंत का कहना है कि इतनी उम्र में मनोविज्ञान और नैचुरोपैथी जैसे विषयों के प्रति उम्रदराज लोगों का रुझान कौतुक भरा है। इस विवि का कोर्स मैटेरियल उम्दा है और एक्सपर्ट द्वारा बनवाया गया है। संभवत: ये लोग डिग्री के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल के लिए भी यूओयू से पढ़ाई कर रहे होंगे।

आजादी के पहले से ही पढ़ने-लिखने की ललक थी, लेकिन पारिवारिक अशांति की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई। इसका निदान ढूढ़ने और ज्ञानवर्द्धन के लिए ही मनोविज्ञान के मैटेरियल का अध्ययन कर डिग्री हासिल के लिए इसकी परीक्षा भी दे रहा हूं। साथ ही अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर एक किताब लिखने जा रहा हूं। उम्मीद है अवसाद में जी रहे युवाओं को इससे सही दिशा मिलेगी।
- योगानंद पांथ्री, छात्र यूओयू, उम्र- 77 साल
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