जितनी तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है, ऐसे हालात में वाहनों को नियंत्रण में करने के लिए ऑड-ईवेन जैसा फार्मूला आवश्यक है। डीएवी कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग की ओर से ‘समाज और सतत विकास’ विषय पर आयोजित सेमिनार में आए विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे फार्मूलों की पैरवी की।
बुधवार को डीएवी के दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित सेमिनार का शुभारंभ प्रो. केएल शर्मा ने किया। इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. मृदुला शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। प्राचार्य डॉ. राकेश वर्मा ने सेमिनार के विषय में बताया। इस मौके पर प्रो. एसबी सिंह ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली में अपनाया गए ऑड-ईवेन फार्मूला का अन्य शहरों में भी इस्तेमाल होना चाहिए। एसएयूके के अध्यक्ष प्रो. बीएस बिष्ट ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अवधारणा पर प्रकाश डाला।
लखनऊ विवि के प्रो. सुकांत चौधरी ने ग्रामीण एवं जनजातीय विकास को सतत विकास का पर्याय माना। सामाजिक कार्यकर्ता शशिभूषण मैठानी ने कहा कि सतत विकास की आवश्यकता ग्रामीण एवं पहाड़ी क्षेत्र में मौलिक विकास की है। सेमिनार में विभिन्न संस्थानों से आए छात्रों ने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। इस मौके पर डॉ. अर्चना पाल, डॉ. सत्यम द्विवेदी, डॉ. रवि भूषण, डॉ. अजय सक्सेना, डॉ. रेखा त्रिवेदी, डॉ. एसके सिंह, डॉ. विवेक त्यागी ने भी अपने विचार रखे।