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हॉबी सब्जेक्ट के नाम पर लाखों छात्रों से बड़ा मजाक

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हिमाचल के कॉलेजों में पिछले सत्र से लागू रूसा (सीबीसीएस) च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम में हॉबी विषय पढ़ने के नाम पर हजारों छात्रों से मजाक हो रहा है। रूसा में ऐसे 68 विषय हैं जिन्हें हॉबी विषय के रूप में छात्र ले सकता है। लेकिन हद है कि इनके लिए एक भी कॉलेज के पास टीचर नहीं है।
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इनमें माउंटेनरिंग, स्वीमिंग और डिजिटल फोटोग्राफी जैसे विषय शामिल हैं। इन्हें पढ़ाने को न तो कॉलेजों में मूलभूत सुविधा है और न हीं शिक्षक। कॉलेज छात्र वही विषय पढ़ पाएंगे जिन्हें पढ़ाने की सुविधा उपलब्ध है।

रूसा के तहत पहले तीन सत्र में ही हॉबी को विषय के रूप में पढ़ाया जा सकता है। म्यूजिक के बांसुरी, तबला वादन और गिटार बजाना भी छात्रों को सीखना पड़ रहा है। छात्रों की इसमें रुचि है या नहीं इससे कोई सरोकार नहीं। अन्य सही मायने में हॉबी के विषय कॉलेजों में उपलब्ध ही नहीं है।
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मजबूरन करना पड़ रहा चुनाव

हॉबी विषय के चूंकि डिग्री में अंक/तीन क्रेडेट्स जोड़े जाने हैं इसलिए छात्रों को मजबूरन उपलब्ध विषयों को ही चुनना पड़ रहा है। सही मायने में कॉलेज के शिक्षकों और प्रशासन को भी इन 68 विषयों तो दूर कॉमन हॉबी विषयों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है।

इसका असर कॉलेजों में चल रहे एनसीसी, एनएसएस, रेंजर रोवर, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। छात्र इनमें कम रुचि दिखा रहे हैं। कारण यह हॉबी में शामिल ही नहीं हैं। राजकीय कॉलेज प्रवक्ता संघ और कॉलेज प्राचार्यों ने शिक्षा विभाग और विवि प्रशासन को लिखित में भी सुझाव दिए हैं पहले से कॉलेजों में चल रही एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एंड गाइड जैसी गतिविधियों को हॉबी विषय के रूप में शामिल किया जाए।

यदि ये हॉबी विषय बनते है, तो इसके लिए कॉलेजों में स्टाफ, प्रशिक्षक के साथ ही सिलेबस तक तैयार है। इनमें मेरिट आधार पर छात्रों को क्रेडेट्स देना भी आसान होगा।
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संभव नहीं सभी विषय पढ़ाना

संजौली कॉलेज प्राचार्य डा. जेएस नेगी और कोटशेरा कॉलेज प्राचार्य डा. उमा रणदेव ने कहा कि विवि और शिक्षा विभाग के साथ हुई बैठकों में हॉबी के विषयों को उपलब्ध मूल सुविधाओं और स्टाफ के मुताबिक व्यवहारिक बनाया जाए। इन विषयों की परीक्षा को भी विवि ही अन्य विषयों की तरह से करवाए।

फिलहाल म्यूजिक, अर्थशास्त्र और कंप्यूटर आदि उपलब्ध विषयों से जुड़े सूची में शामिल हॉबी विषयों को शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। एनसीसी, एनएसएस और खेल आदि का सिलेबस तैयार कर इन्हें हॉबी विषयों की सूची में शामिल करें।

व्यावहारिक बनाएं हॉबी विषय पढ़ाना
राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष आरके कायस्थ ने कहा कि हॉबी विषय को व्यावहारिक और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए ही कॉलेजों में पढ़ाने की व्यवस्था हो। इसे छात्रों पर थोपा न जाए। कोकरिकुलर एक्टिविटी को हॉबी विषयों की सूची में शामिल करें। उपलब्ध विषय कॉलेज में पढ़ाना संभव नहीं। विवि इस पर मंथन कर छात्र हित में फैसला लें। इसमें खानापूर्ति न कर सुझावों पर गौर करें।
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