स्नातक कक्षाओं में सीटें बढ़ने पर दाखिला मिल जाने की आस लगाए बैठे छात्रों को इस बार तगड़ा झटका लगा है।
राज्य सरकार इस बार स्नातक में सीटें बढ़ाने का आदेश जारी नहीं करेगी। कोर्ट ने शिक्षक-छात्र अनुपात का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे में अगर पिछले साल की तरह इस बार भी 33 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जातीं तो शिक्षक-छात्र का अनुपात बुरी तरह बिगड़ जाता।
ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग सीटें बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं करेगा। कोर्ट ने एक्ट के प्रावधान के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एक्ट में कुलपति को अधिकार है कि वह कॉलेजों और विश्वविद्यालय की सीटें बढ़ा सकते हैं मगर विवि प्रशासन ऐसा करने वाला नहीं।
इस बार इंटरमीडिएट में सीबीएसई व आईएससी के साथ-साथ यूपी बोर्ड का रिजल्ट भी अच्छा गया था और इसमें 92.68 प्रतिशत छात्र पास हुए थे।
ऐसे में डिग्री कॉलेजों में सीटें बढ़ाने पर जबरदस्त दबाव है क्योंकि मेरिट काफी ऊंची जाने के कारण फर्स्ट डिविजन पास स्टूडेंट को भी दाखिला मिलना मुश्किल हो रहा है।
स्नातक में राजधानी के 113 डिग्री कॉलेजों में कुल 47,829 सीटें हैं। अगर 33 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जातीं तो 15,783 सीटें बढ़ जातीं और छात्रों को बड़ी राहत मिल जाती लेकिन ऐसा न होने से कई छात्रों को एडमिशन मिल पाना मुश्किल है।
इस बार राजधानी में इंटरमीडिएट के करीब 60 हजार छात्र पास हुए हैं। इसमें से बड़ी संख्या फर्स्ट डिविजन वालों की है। दूसरी ओर आसपास के जिलों उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई आदि के अलावा पूर्वांचल के जिलों से भी कई छात्र राजधानी में ग्रेजुएशन करने आते हैं।
अब तक हर बार स्नातक में उपलब्ध सीटों में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी जाती थी तो छात्रों को बड़ी राहत मिल जाती है।
इस बार स्नातक कक्षाओं में सबसे अधिक मारामारी बीकॉम में दाखिले को लेकर है क्योंकि इस कोर्स में सीटें सबसे कम हैं और दाखिले के लिए दावेदारी कम से कम दस गुना है।
इसमें डिग्री कॉलेजों में कटऑफ बमुश्किल 70 प्रतिशत के नीचे आ रही है। बीएससी मैथ्स में भी पहली बार दावेदारी अच्छी खासी है। इसमें भी कटऑफ 70 से 65 प्रतिशत के बीच है।
ऐसे में डिग्री कॉलेजों में दाखिले को लेकर दबाव अधिक है। कॉलेजों में भी छात्रों को लगातार संपर्क में रहने को कहा जा रहा है ताकि सीटें बढ़ने पर उन्हें मेरिट लिस्ट में स्थान दिया जा सके।
फिलहाल हाईकोर्ट ने सुरेश पांडेय बनाम स्टेट ऑफ यूपी वाद में शिक्षक-छात्र अनुपात व एक्ट में दिए गए प्रावधान को देखकर सीटें बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद अब उच्च शिक्षा विभाग इस बार सीटें बढ़ाने का कोई आदेश जारी करने नहीं जा रहा। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन भी ऐसा नहीं करने वाला है।
राजधानी में शिक्षक-छात्र अनुपात
राजधानी में शिक्षक छात्र का अनुपात हर बार सीटें बढ़ाने और पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की भर्ती न हो पाने के कारण बढ़कर 1:110 हो गया है। इस समय लविवि और डिग्री कॉलेजों में कुल 1250 शिक्षक हैं और इसकी तुलना में 1.37 लाख छात्र हैं।