यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के एक आदेश ने टेक्निकल कालेज प्रबंधकों की नींद उड़ा दी है। यूजीसी ने 2014-15 सत्र में कोई भी नया टेक्निकल कालेज शुरू नहीं करने और मौजूदा कोर्स में सीटों की बढ़ोतरी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
ट्राइसिटी और इसके आसपास काफी संख्या चल रहे प्राइवेट टेक्निकल कालेजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। अगले सत्र से 3-4 नए टेक्निकल कालेज के लिए करोड़ों की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। इन कालेजों की संबंधित यूनिवर्सिटी से इंस्पेक्शन भी हो चुकी है।
नए शुरू होने वाले एक टेक्निकल कालेज पर 15 से 20 करोड़ रुपये का खर्च आता है। ऐसे कालेज में 250 से 300 सीटों पर विद्यार्थियों को दाखिला मिलना था। आर्यन ग्रुप चेयरमैन डा. अंशु कटारिया ने बताया कि पंजाब में ही 30 के करीब प्राइवेट टेक्निकल कालेज हैं।
अधिकतर को अगले सत्र से सीटें बढ़ाने की मंजूरी की परिक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन यूजीसी के आदेश से इन कालेजों को काफी नुकसान होगा।
जीएनए आईएमटी फगवाड़ा के प्रेसिडेंट गुरदीप सिंह ने कहा कि पिछले 10 साल से एजूकेशन फिल्ड में हैं। 2014 से इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है, लेकिन यूजीसी के फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो जाएगा।
यूजीसी के हवाले किए टेक्निकल कालेज
टेक्निकल कालेजों में गिरते क्वालिटी स्तर के बाद मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलेपमेंट(एमएचआरडी) ने यूजीसी को इसकी कमान सौंप दी है। पहले टेक्निकल कालेजों को मान्यता देने का काम एआईसीटीई के पास था।
यूजीसी का यह फैसला एक साल के लिए ठीक हो सकता है। लेकिन यूजीसी ने गलत समय पर फैसला लिया है। अधिकतर इंस्टीट्यूट ने अगले सत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी खर्च कर दिया है। इस नियम को अगले साल लागू किया जा सकता है।
डा.अंशु कटारिया, चेयरमैन, आर्यन ग्रुप ऑफ कालेजेज
इस सत्र से इंजीनियरिंग कालेज शुरू करना है। पीटीयू से एफिलिएशन की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। 2-3 साल की मेहनत और करोड़ों की लागत से इंटरनेशनल स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था। यूजीसी विदेशी यूनिवर्सिटी को मंजूरी दे रही है, जबकि लोकल प्लेयर को इस तरह के आदेशों से झटका दिया जा रहा है। यूजीसी को फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
जेएस बजाज,चेयरमैन, बजाज इंजीनियरिंग कालेज, लुधियाना
टेक्निकल एजूकेशन में क्वालिटी लाने के लिए यूजीसी का यह फैसला एकदम सही है। पिछले कुछ सालों से टेक्निकल प्रोग्राम का स्तर काफी गिरा है। इंजीनियरिंग करने के बाद भी सिर्फ 10 फीसदी युवाओं को नौकरी मिल पा रही है। संस्थान तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर को दूसरे काम में प्रयोग कर सकते हैं।
सीए मनमोहन गर्ग, चेयरमैन, गुरुकुल विद्यापीठ ग्रुप