केंद्रीय व डीम्ड विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आवेदन करते समय की कुछ बाध्यताओं से अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने राहत दी है।
अंक पत्र व प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी सत्यापित कराने के झंझट से उन्हें मुक्ति मिल गई और अब शपथ पत्र भी नहीं बनवाना पड़ेगा।
इस आशय का आदेश यूजीसी ने केंद्रीय व डीम्ड विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को जारी कर दिया गया है। अभी तक की व्यवस्था के तहत ज्यादातर शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए आवेदन करते समय अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों की छायाप्रतियां लगानी होती हैं।
छायाप्रतियां असली हों इसके लिए उनको राजपत्रित अधिकारियों से सत्यापित करवाना जरूरी होता है। इसे सत्यापित करवाने के लिए अभ्यर्थियों को राजपत्रित अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ऐसे में अभ्यर्थियों को तो परेशानी होती ही है अधिकारियों का कामकाज भी बाधित होता है। आवेदन पत्र के साथ कुछ प्रमाणपत्रों के न होने की सूरत में शपथपत्र भी मांगा जाता है।
शपथपत्र बनवाने में भी अभ्यर्थियों का समय और धन दोनों खर्च होता है। सरकारी संगठनों में कामकाज को सरल व तेज बनाने के लिए नागरिक केंद्रित प्रशासन की कल्पना की गई थी। इसके लिए प्रशासनिक सुधार आयोग की स्थापना की गई थी।
आयोग के सुझाव पर सचिव भारत सरकार संजय कोठारी ने 10 मई को राजपत्रित अधिकारियों से छायाप्रतियां सत्यापित करवाने और शपथपत्र की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए यूजीसी से कहा था। इसके बाद बीती 19 अगस्त को यूजीसी के शिक्षा अधिकारी डॉ. आर मनोज कुमार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है।