विधि की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा क्लैट में पहली बार स्टेट की रैंक तो जारी हुई है लेकिन उत्तराखंड के छात्रों के लिए इसका कोई फायदा नहीं होगा। चूंकि राज्य में अभी तक राष्ट्रीय विधि विवि अस्तित्व में नहीं आया है, इसलिए यहां के छात्रों को आल इंडिया रैंक पर ही प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
देश के तमाम राज्यों के विधि विश्वविद्यालयों में उस राज्य के छात्रों को अलग से आरक्षण मिलता है। इस बार परीक्षा आयोजक राम मनोहर लोहिया विवि, लखनऊ ने प्रक्रिया सरल करने के लिए स्टेट रैंक भी जारी की।
इस स्टेट रैंक के आधार पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिमी बंगाल सहित कई राज्यों के युवाओं को दाखिला मिलेगा लेकिन अपने प्रदेश के होनहारों के लिए प्रतियोगिता वैसी ही है।
दरअसल, प्रदेश में आज तक राष्ट्रीय विधि विवि की स्थापना नहीं हो पाई है। यह विवि भवाली, नैनीताल में स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। विवि न होने की वजह से प्रदेश के छात्रों की स्टेट रैंक किसी काम की नहीं है।
इससे होनहारों में निराशा भी है। उन्हें अब ऑल इंडिया रैंक के आधार पर ही राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रतियोगिता का सामना करना पड़ेगा।