बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में पीएचडी और एमफिल प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को आगामी सत्र से साक्षात्कार का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पीएचडी और एमफिल के प्रवेश केवल ऑनलाइन परीक्षा की मेरिट के आधार पर होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय अपने ऑर्डिनेन्स में बदलाव करने जा रहा है।
संभावना है कि इन सभी के लिए आवेदन फॉर्म फरवरी में आ जाएंगे और 31 मार्च से पहले इनकी प्रवेश परीक्षा भी करा ली जाएगी। विवि के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने बताया कि पीएचडी और एमफिल के प्रवेश केवल ऑनलाइन परीक्षा की मेरिट के आधार पर करने से उसमें पारदर्शिता बढ़ेगी।
हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक, ऑर्डिनेन्स में बदलाव के साथ ऑनलाइन परीक्षा के प्रश्न पत्र में कुछ अहम बदलाव किए जा सकते हैं।
पिछले सालों में पीएचडी और एमफिल के प्रवेश के दौरान कई अभ्यर्थी भेदभाव का आरोप लग चुके हैं। दरअसल, अभी तक की व्यवस्था में अभ्यर्थी को 85 नंबर का ऑनलाइन पेपर और 15 नंबर के लिए साक्षात्कार का सामना करना होता है।
इसी साक्षात्कार में वह अपना प्रेजेंटेशन भी देता है। अमूमन एक रिक्त सीट के लिए ऑनलाइन परीक्षा की मेरिट के अनुसार तीन अभ्यर्थियों को बुलाया जाता है। इसमें कई बार यह देखा गया कि कम मेरिट वाला साक्षात्कार में अधिक अंक पाकर प्रवेश ले जाता है जबकि परीक्षा में अधिक अंक पाने वाले को प्रवेश नहीं मिलता।
जेआरएफ का वेटेज भी खत्म होगा
इंटरव्यू के नंबरों को आधार बनाकर कई बार भेदभाव के आरोप लग चुके हैं। मगर, नई व्यवस्था में केवल ऑनलाइन परीक्षा होने पर यह समस्या खत्म हो जाएगी। कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने बताया कि अब पूरे 100 अंक के लिए केवल लिखित परीक्षा होगी। इसमें मेरिट के आधार पर अभ्यर्थी को प्रवेश मिलेगा और सीटें भरते ही प्रवेश बंद हो जाएगा।
साक्षात्कार की व्यवस्था खत्म होने के साथ ही नॉन जेआरएफ वालों के लिए मौका भी बढ़ेगा। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. कमल जायसवाल ने बताया कि साक्षात्कार की व्यवस्था में जेआरएफ अभ्यर्थियों को पांच नंबर का वेटेज दिया जाता है।
ऐसे में नॉन जेआरएफ वाले पहले ही उनसे कम अंक पर होते हैं, जिससे उनके प्रवेश की संभावना भी कम हो जाती है। सबसे मुश्किल तो उन विभागों में प्रवेश पाना है जहां 1-2 सीटें ही रिक्त होती हैं। मगर, अब केवल ऑनलाइन परीक्षा की स्थिति में सभी को बराबर का मौका मिलेगा।
डॉ. जायसवाल के मुताबिक, जल्द ही विश्वविद्यालय में बैठक कर पीएचडी और एमफिल के प्रवेश से जुड़े ऑर्डिनेन्स में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद कार्यपरिषद से अनुमोदन लेकर इसे लागू कर दिया जाएगा, जिससे आगामी प्रवेश में नई प्रक्रिया को अपनाया जा सके।
एलयू ने भी किए थे बदलाव
इसी साल लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने यहां पीएचडी ऑर्डिनेन्स में अहम बदलाव किए हैं। इसमें साक्षात्कार को शामिल किया गया है। इसके लिए विवि का तर्क यह था कि नया पीएचडी ऑर्डिनेन्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार है, जिसमें साक्षात्कार होना चाहिए।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि यदि यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुसार पीएचडी में प्रवेश के लिए साक्षात्कार जरूरी है तो बीबीएयू पहले से लागू इस व्यवस्था को खत्म क्यों कर रहा है।
इस बारे में पूछने पर बीबीएयू प्रवक्ता डॉ. कमल जायसवाल ने बताया कि यूजीसी ने प्रवेश संबंधी प्रक्रिया के लिए कुछ गाइडलाइंस का सेट दिया हुआ है।
उसमें न्यूनतम अर्हता की तो अनिवार्यता है, लेकिन इस बात की अनिवार्यता नहीं कि साक्षात्कार कराया ही जाए। विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थाएं हैं जो उसे अपनी आवश्यकतानुसार संशोधन करके लागू कर सकती हैं।