अब विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को संस्थान में कम से कम छह घंटे रुकना होगा। शिक्षकों की प्रोन्नति भी एकेडमिक परफॉर्मेंस (एपीआई) के अनुसार होगी।
यही नहीं, शिक्षकों की कैजुअल लीव अब साल में 14 नहीं, बल्कि आठ होंगी। राज्य सरकार ने यूजीसी के 30 जून, 2010 के प्रावधानों को लागू करने के लिए राज्य विश्वविद्यालय एक्ट में संशोधन किया है।
विशेष सचिव उच्च शिक्षा ने आदेश जारी कर संशोधन सुनिश्चित करने को कहा है। मालूम हो कि महामहिम राज्यपाल बीएल जोशी ने बीती 11 अप्रैल, 2013 को संशोधन पर सहमति जता दी थी।
उसके बाद अब राज्य सरकार की ओर से भी प्रथम परिनियमावली में संशोधन के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एक्ट में हुए संशोधन के अनुसार अब शिक्षकों को अपने संस्थान में कम से कम छह घंटे रुकना होगा।
इसके लिए साल भर में 52 हफ्तों का विभाजन कर दिया गया है। वहीं, 30 जून, 2010 के बाद जिन शिक्षकों की प्रोन्नति नहीं हुई है, उनका प्रमोशन अब एकेडमिक परफॉर्मेंस इंटीकेटर (एपीआई) के अनुसार होगा।
परिनियमावली में राज्य सरकार की ओर से संशोधन पर मुहर न लगाने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। अब विश्वविद्यालय व कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति का रास्ता भी साफ हो गया है।
शिक्षकों के लिए कोड ऑफ प्रोफेशनल एथिक्स भी बनाए गए हैं। इसके तहत टीचर्स को अपने आचरण पर विशेष ध्यान देना होगा। नियमों में संशोधन के बाद अब शिक्षकों को कैजुअल लीव 14 के बजाय आठ मिलेंगी।
वहीं, चाइल्ड केयर लीव के तहत महिला शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, अब यह लीव दो साल की मिलेगी। यह नियम सख्ती से लागू होगा, जिससे संस्थान महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव देने में आनाकानी नहीं कर पाएंगे।
नियमों में कहा गया है कि चाइल्ड केयर लीव के तहत दो साल की छुट्टी पर शिक्षिका के रहने पर कॉलेज व विश्वविद्यालय उसकी जगह संविदा पर कोई शिक्षक तैनात कर सकता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
यूजीसी इसके लिए यूनिवर्सिटी व कॉलेजों को मानदेय पर शिक्षक रखने का खर्चा भी देगी। वहीं, अब प्रवक्ता पद की भर्ती पर एससी-एसटी, दृष्टिबाधित और शारीरिक निशक्त अभ्यर्थियों को पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) अंक प्रतिशत में पांच प्रतिशत की छूट दी गई है।
यानि, अब पीजी में उनके 50 प्रतिशत अंक भी होंगे, तो वह शिक्षक पद के लिए अर्ह होंगे।
टीचिंग के दिनों का विभाजन
एक साल में शिक्षकों को कितने दिनों की छुट्टी मिलेगी और उन्हें कितने दिन पढ़ाई होगी, यह तय कर दिया गया है। हफ्ते में 36 घंटे तो गुरुजी यूनिवर्सिटी व कॉलेज में रुकेंगे ही। इसके लिए वर्ष भर के टीचिंग के दिनों का विभाजन कर दिया गया है।
गुरुजी को निभाने होंगे शैक्षणिक उत्तरदायित्व
उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की प्रथम परिनियमावली में संशोधन के बाद अब यूजीसी की ओर से सुझाए गए जो उपाय लागू होंगे।
उसके अनुसार शिक्षकों को अब संस्थान में शैक्षणिक उत्तरादायित्वों को ढंग से निभाना होगा। कोड ऑफ प्रोफेशनल एथिक्स के तहत उन्हें अब इन बातों का खास ध्यान देना होगा।
शिक्षक समाज के लिए आदर्श माने जाते हैं, अपना धैर्य बनाए रखना चाहिए, गुस्से पर काबू रखना चाहिए और सभी से अच्छा व्यवहार करना चाहिए
उन्हें अपने संस्थान के शैक्षिक कार्यक्रमों में पूरा सहयोग देना होगा। परीक्षा, प्रवेश व छात्र के मार्गदर्शन सहित सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का हिस्सा बनना होगा।
टीचिंग, ट्यूटोरियल, प्रैक्टिकल, सेमिनार, सिम्पोजियम व रिसर्च पूरी जिम्मेदारी के साथ करवाना होगा। कॅरियर बढ़ाने के लिए उसे नियमित रूप से अध्ययन और रिसर्च का काम करते रहना चाहिए।
को-करिकुलर एक्टिविटीज के साथ-साथ एक्सट्रा कॅरि-कुलर एक्टिविटी में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना होगा। यानि उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेल, संगीत आदि में भी अपना रुझान रखना होगा।