अनुमन्य सीटों से अधिक छात्रसंख्या पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद डीएवी समेत देहरादून के सभी महाविद्यालयों का भार कम करने की कवायद शुरू हो गई है।
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54 साल बाद दून को एक नया कॉलेज मिलने वाला है। रायपुर में नया राजकीय महाविद्यालय शुरू होगा, जहां बीए और बीकॉम के दाखिले इसी सत्र से दिए जाएंगे। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने कॉलेज को संबद्धता दे दी है।
गत वर्ष प्रदेश सरकार ने दून में नया महाविद्यालय खोलने की घोषणा की थी।
हालांकि, कॉलेज के लिए अभी जमीन की तलाश पूरी नहीं हुई है। इस बीच हाईकोर्ट ने डीएवी कॉलेज में तय सीटों से दोगुने से भी अधिक दाखिले करने के मामले पर सख्ती दिखाई।
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हजारों छात्रों पर छाए थे संकट के बादल
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया गया कि विवि की ओर से अनुमन्य सीटों पर ही दाखिले दिए जाएं। इसके बाद इस सत्र में दाखिला लेने वाले हजारों छात्रों पर संकट बढ़ गया था।
ऐसे में नया कॉलेज इसी सत्र से शुरू किया जा रहा है। इसके बाद सहस्त्रधारा रोड पर किराये के भवन में चलने वाले इस कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य का जिम्मा डॉ. एनपी माहेश्वरी को दिया गया है।
डॉ. माहेश्वरी उच्च शिक्षा विभाग के उप निदेशक हैं। इसके अलावा कॉलेज में 23 शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों के पद भी सृजित कर लिए गए हैं।
जल्द ही नई भर्ती या दूसरे कॉलेजों से शिक्षकों के स्थानांतरण के जरिये ये पद भरे जाएंगे।
हर विषय में 120 सीट
बता दें कि डीएवी, एमकेपी और डीबीएस की स्थापना के बाद वर्ष 1960 में दून में एसजीआरआर पीजी कॉलेज आखिरी कॉलेज था।
इसके बाद से हर साल छात्रों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन महाविद्यालय ये चार ही रहे। अब 54 साल के बाद नया महाविद्यालय दून को मिला है।
राजकीय महाविद्यालय रायपुर में बीए के हर विषय में 120 सीट होंगी। 60-60 सीट के दो सेक्शन बनाए जाएंगे। बीकॉम में कुल 120 सीट होंगी।
डीएवी और श्री गुरु रामराय पीजी कॉलेज में हर साल बीकॉम में दाखिले के लिए मारामारी का आलम रहता है। ऐसे में यह कॉलेज छात्रों के लिए राहत का सबब बनेगा।
डीएवी में चल सकती हैं इवनिंग क्लास
दूसरी ओर, बीएससी में दाखिले के इच्छुक छात्रों को इस बार ज्यादा मशक्कत करनी होगी।
क्योंकि डीएवी, डीबीएस और एसजीआरआर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दाखिले सिर्फ मेरिट के आधार पर होंगे।
डीएवी कॉलेज में अनुमन्य सीटों पर दाखिले का दबाव कम करने के लिए इवनिंग क्लास पर विचार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इवनिंग कक्षाएं सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित होंगी, जिनका शुल्क काफी कम होगा। हालांकि इस फैसले पर अब तक मुहर नहीं लगी है।
राजकीय महाविद्यालय के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने दो जगह भूमि तलाशी थी, लेकिन दोनों ही जलमग्न श्रेणी की थीं।
इससे शासन ने इन्हें रिजेक्ट कर दिया था। अब नए सिरे से भूमि तलाशी जा रही है।
सहस्त्रधारा रोड पर भवन के अनुमोदन और बजट आवंटित होने के साथ ही एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर ली जाएगी। कालेज का एड्रेस तय होते ही प्रास्पेक्टस प्रकाशित कराए जाएंगे। कालेज में फीस प्रदेश के अन्य राजकीय महाविद्यालयों की तर्ज पर रहेगी। - डॉ. एनपी माहेश्वरी, कार्यवाहक प्राचार्य (उप निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग)