पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर संगोष्ठी आयोजित कर नई शिक्षा नीति पर विचार विमर्श किया गया। इसके तहत 10 ऐसे सुझाव दिए गए, जो देश में शिक्षा का स्तर सुधारने में सहायक होंगे। संगोष्ठी में हरियाणा प्रदेश के सभी शिक्षाविदों, गैर सरकारी संगठनों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इन सभी ने शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यूपीए सरकार की ओर से पहली से आठवीं कक्षा तक किसी बच्चे को फेल नहीं करने की नीति को शिक्षाविदों ने सिरे से नकार दिया है। शिक्षाविदों ने परीक्षा परिणाम में ग्रेडिंग सिस्टम को भी गलत ठहराया है।
सभी का मानना है कि फेल नहीं किए जाने की नीति के कारण बच्चे पढ़ाई से विमुख हो रहे हैं और उनमें कुछ सीखने की भावना भी खत्म हो रही है। इसके साथ ही बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापक भी लापरवाह होते जा रहे हैं।
पंचकूला के सेक्टर-14 स्थित पंचायत भवन में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्वावधान में हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से यह संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी में 13 विषयों पर विचार विमर्श किया गया
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित इस संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति पर विचार के लिए 13 थीम पर विचार-विमर्श करने के बाद जो नतीजे सामने आए, उन्हें संगोष्ठी के समापन पर उपस्थित मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंपा गया। राज्य सरकार इस निष्कर्ष को केंद्र सरकार को भेजेगी।
संगोष्ठी के दौरान जिन 13 थीम पर विचार-विमर्श हुआ, उनके तहत एलीमेंटरी शिक्षा में सीखने के परिणाम सुनिश्चित करने, सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी शिक्षा में विस्तार, वोकेशनल शिक्षा को मजबूत बनाने, स्कूल एग्जामिनेशन सिस्टम में सुधार करने, अच्छे टीचर तैयार करने के लिए अध्यापक शिक्षा में सुधार करने सहित महिला, आरक्षित वर्ग, तकनीकी एवं वैज्ञानिक शिक्षा के विषय प्रमुख रहे। विभिन्न थीमों पर मंथन के बाद यह निष्कर्ष निकला कि प्रदेश के स्कूलों में अध्यापकों की कमी, उनसे अध्यापन से इतर काम लिया जाना, निजी स्कूलों की भांति सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी व नर्सरी कक्षाओं का प्रावधान नहीं होना और विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों का भी शिक्षा के प्रति रुचि नहीं दिखाना गंभीर मुद्दे हैं।
नई शिक्षा नीति के लिए दिए गए ये 10 सुझाव
- नई शिक्षा नीति में राष्ट्रीय स्तर पर एक बोर्ड का गठन कर सारी शिक्षा व्यवस्था उसी के अधीन चलाई जाए
- नई नीति में स्कूली शिक्षा को केवल अंकों पर आधारित न रखकर व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया।
- स्कूलों की हालत ऐसी होनी चाहिए कि बच्चों का आकर्षण बढ़े और अभिभावकों के प्रति स्कूल प्रबंधकों का व्यवहार भी आत्मीयता भरा हो।
- किसी बच्चे को फेल नहीं करने की नीति से बच्चे लापरवाह हो रहे हैं। वे अनुशासन में रहना पसंद नहीं कर रहे हैं और उनमें सीखने की क्षमता भी खत्म हो रही है। इससे दसवीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम खराब आ रहे हैं।
- छोटी कक्षाओं में ही बोर्ड परीक्षा का प्रावधान हो। तीसरी व पांचवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा लागू करने की सलाह।
- बच्चों के अभिभावकों की काउंसिलिंग कराने पर भी जोर दिया गया ताकि वे बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि दिखाएं
- बच्चों को नहीं पढ़ाने वाले अभिभावकों पर भी लगाई जाए चुनाव लड़ने पर रोक
- स्कूल से गैरहाजिर रहने वाले अध्यापक दंडित किए जाएं। नियमित अध्यापकों के लिए आवासीय कालोनियां बनें
- सभी स्कूलों में साइंस लैब और कंप्यूटर लैब सुव्यवस्थित हों और टीचरों के लिए भी सुविधाएं जुटाई जाएं
- परीक्षा परिणाम के लिए ग्रेडिंग सिस्टम न हो। प्रत्येक कक्षा में योग्यता टेस्ट का प्रावधान किया जाए