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जरूर पढ़ें, विश्वविद्यालय का एक और कारनामा

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प्रदेश विश्वविद्यालय का एक और कारनामा सामने आया है। एमएससी भूगोल प्रथम सत्र की परीक्षा में पुराने पैट्रन के प्रश्नपत्र ही बांट दिए गए। परीक्षा के दौरान जो प्रश्नपत्र बांटा गया, वह पुराने एमए भूगोल पैटर्न का था। इस कारण छात्र परीक्षा नहीं दे पाए। परीक्षार्थियों की शिकायत पर भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. डीडी शर्मा ने माना कि प्रश्नपत्र पुराने सिलेबस और पैटर्न का प्रिंट होकर आ गया था।
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परीक्षा दोबारा होगी। सेमेस्टर की अन्य परीक्षाएं तय तारीख को ही होंगी। छात्रों का कहना है कि उन्होंने तैयारी साइंस विषय की तरह एमसीक्यू मल्टीपल च्वायस प्रश्नों की तरह की थी, मगर प्रश्नपत्र में सोलह नंबर के प्रश्न दिए गए थे। छात्रों ने मामले को विभागाध्यक्ष से उठाया।

यह है पूरा मामला

विभागाध्यक्ष ने प्रश्नपत्र को पुराने एमए भूगोल पैटर्न के मुताबिक पाया तो डिपार्टमेंट काउंसिल की बैठक की। इसके बाद मामला परीक्षा नियंत्रक से उठाया गया। प्रदेश विवि की ईसी के फैसले के मुताबिक पीजी सेंटर के भूगोल विभाग की डिग्री को एमए भूगोल की जगह एमएससी भूगोल तो किया गया है, लेकिन वीरवार को एमएससी भूगोल प्रथम सत्र की परीक्षा में प्रश्नपत्र नए पैटर्न के हिसाब से नहीं बांटे गए।

दरअसल चपीयू के भूगोल विभाग में एमए के बदले एमएससी भूगोल की डिग्री की गई है। इसके मुताबिक सिलेबस और प्रश्नपत्र का पैटर्न बदला जाता है। एमएससी भूगोल प्रथम सत्र की परीक्षा में प्रश्नपत्र पुराने एमए डिग्री के पैटर्न और सिलेबस के मुताबिक बांटे गए। एमए के प्रश्नपत्र पैटर्न की तरह से इसमें 16 अंक के प्रश्न पूछे गए थे। एमएससी में एक दो और तीन अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। उधर, एसएफआई ने परीक्षा दोबारा करवाने की मांग की है।
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जांच के बाद होगी कार्रवाई : कौशल

परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने कहा कि वह इस मामले की जांच खुद करेंगे। यदि पेपर सेटर के स्तर पर कमी रही होगी तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है। परीक्षा दोबारा करवाई जाएगी।

नए सिलेबस और पैटर्न के मुताबिक प्रश्नपत्र छपवाए जाएंगे। परीक्षा में हुई इस चूक में जिसका दोष होगा, उस पर कार्रवाई होगी।
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