लखनऊ विश्वविद्यालय के पीएचडी एंट्रेंस में इस बार स्टूडेंट्स को काफी संभलकर प्रश्न पत्र हल करना होगा। पहली बार एलयू पीएचडी एंट्रेंस में माइनस मार्किंग की व्यवस्था करने जा रहा है।
विवि प्रशासन का कहना है कि इसके पीछे मंशा है कि अच्छी मेरिट तैयार हो। यूनिवर्सिटी के पीएचडी ऑर्डिनेंस में कई अन्य व्यवस्स्थाएं की गई हें। इन प्रस्तावों को आगे विवि पास कराएगा।
इसके अलावा पीएचडी एंट्रेंस अब साल में दो बार होगा, ताकि शिक्षकों के अंडर में पीएचडी के लिए निर्धारित सीटें वर्ष में खाली होने पर उन्हें जल्द से जल्द भरा जा सके।
लखनऊ विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में माइनस मार्किंग की जाएगी। यूनिवर्सिटी के नए पीएचडी आर्डिनेंस में ऐसा प्रस्ताव रखा गया है।
पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में 100 नंबर का लिखित प्रश्नपत्र होगा और इसमें 100 सवाल होंगे।
स्टूडेंट अगर कोई सवाल गलत हल करेगा तो 0.25 नंबर काट लिए जाएंगे। अगर उसने चार गलत सवाल किए तो उसका एक सही सवाल गलत हो जाएगा। प्रत्येक सवाल के एक नंबर निर्धारित किए गए हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने माइनस मार्किंग करने का प्रस्ताव इसलिए रखा है क्योंकि यूनिवर्सिटी में अभी तक कई विषयों में पीएचडी की जब मेरिट सूची तैयार होती है, तो एक-एक नंबर पर कई स्टूडेंट होते हैं।
वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन अब साल भर में दो बार पीएचडी एंट्रेंस करवाएग्रा, ताकि जो स्टूडेंट जेआरएफ व एसआरएफ पास हैं उन्हें शिक्षकों को आवंटित पीएचडी की सीटें खाली होने पर तत्काल दाखिला मिल सके।
उन्हें सालभर तक इंतजार न करना पड़े। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी ने अपना पीएचडी ऑर्डिनेंस तैयार करने से पहले कई यूनिवर्सिटी के पीएचडी आर्डिनेंस को पढ़ा है।
यूजीसी की गाइडलाइन को 100 प्रतिशत लागू करने का इंतजाम किया गया है।
फिलहाल, यूनिवर्सिटी प्रशासन चाहता है कि यहां पर अच्छे स्कॉलर दाखिला ले पाएं।
राष्ट्रीय स्तर की फैलोशिप तो पीएचडी में सीधे दाखिला
एलयू के पीएचडी ऑर्डिनेंस में राष्ट्रीय स्तर की फैलोशिप व प्रोजेक्ट पाने वाले स्टूडेंट को राष्ट्रीय एग्जाम न देना पड़े।
ऐसा प्रस्ताव रखा गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इन स्टूडेंट्स को सीधे इंटरव्यू लेकर ही दाखिला दे सके, ताकि जिनके पास प्रोजेक्ट है।
वे यूनिवर्सिटी में आकर अपना रिसर्च करें। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ऐसे वैज्ञानिक व शैक्षिक संस्थान, जिससे उसका एमओयू होगा उसके एक्सपर्ट टीचर को अपने स्टूडेंट का को-गाइड बनाएगी।
यानी यूनिवर्सिटी का टीचर उसका प्रमुख गाइड होगा और को-गाइड इस संस्थान का एक्सपर्ट होगा।