लखनऊ की कच्ची खोदी हुई आलू बिना खराब हुए आसानी से कोलकाता के बाजारों में पहुंचेगी। इसी तरह कश्मीर का सेब भी रास्ते में खराब होने की आशंका के बगैर लखनवी बाजारों की रौनक बढ़ाएगा।
ये संभव होगा गणित के मॉडल की वजह से। आईआईटी रुड़की के प्रो. वी के कटियार पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट शिमला के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
केकेवी डिग्री कॉलेज में आयोजित विज्ञान और तकनीक के विकास में गणित की भूमिका विषय पर आयोजित गोष्ठी के दौरान प्रो. कटियार ने बताया कि आलू और सेब की मांग देश के सभी हिस्सों में रहती है।
सबसे ज्यादा समस्या कच्चे आलू को खोदकर दूसरी जगह भेजने में होती है। कच्चा आलू कम मजबूत होता इसलिए रास्ते में खराब हो जाता है। इसलिए हम लोगों ने इसकी पैकिंग में गणितीय मॉडल का प्रयोग किया है।
इस मॉडल के मुताबिक आलू के बीच में पतली पन्नी रखने का प्रयोग किया जा रहा है। इससे आलू और सेब बिना नुकसान के सही सलामत एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकेंगे।
सेमिनार के तीसरे दिन 27 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. अनिल कुमार वशिष्ठ , प्रो. कांती पांडेय, डॉ. आर एस यादव ने व्याख्यान दिए। अतिथि वक्ता डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कार्टून के जरिए गणित को समझने का तरीका बताया।
पल भर में होगी गणना
सेमिनार का आकर्षण पलक झपकते ही बड़ी से बड़ी गणना करने वाले चंदन चंदानी रहे। चंदन चंदानी ने बताया कि कैसे आधार अंकों के जरिए वो बड़ी से बड़ी गणना कर सकते हैं।
सेमिनार में उन्होंने तीन अंक की संख्याओं के पहाड़े सुनाकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। चंदन चंदानी के अनुसार उन्होंने दस साल तक गुणन खंडों के रहस्य, गणना के रहस्य, नंबरों का विश्लेषण और आधार अंकों पर शोध किया है।
यही कारण है कि वो वो सभी गणनाएं आसानी से कर पाते हैं। उनके अनुसार वो अपनी थीसिस छपवाकर कोचिंग खोलना चाहते हैं ताकि सब लोगों को इसका लाभ मिल सके।
युवा गणितज्ञ सम्मानित
केकेवी में आयोजित हुई सेमिनार में नौ युवा गणितज्ञों को अच्छे शोधपत्र प्रस्तुत करने पर सम्मानित किया। सीडीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और प्राचार्य डॉ. सुधीश चंद्र ने हिमांशु चौरसिया, तृप्ति मिश्रा, प्रतीक्षा श्रीवास्तव, डॉ. जाविद अली, डॉ. सईदा दरख्शान जबीन, देवांशु शुक्ला, पूनम यादव, सुदीप कुमार द्विवेदी और चिंकी गंगवार का मान बढ़ाया।