कभी मल्टीनेशनल कंपनियों की चमक-दमक वाली नौकरी का रास्ता खोलने का जरिया माना जाने वाला कोर्स मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) अब युवाओं को नहीं भा रहा।
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द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के ताजा सर्वेक्षण में साफ हुआ है कि देशभर में 220 प्रतिष्ठित बी-स्कूल बंद हो चुके हैं, जबकि 95 संघर्ष के दौर में हैं।
दूसरी ओर, उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) से संबद्ध राज्य के 25 प्रतिशत संस्थानों में भी दाखिलों में गिरावट दर्ज की गई है।
तेजी से बंद होने लगे प्रबंधन संस्थान
एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डीएस रावत के मुताबिक दिल्ली एनसीआर, मुंबई, बैंगलोर, अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ और देहरादून में जितनी तेजी से प्रबंधन संस्थान खुले थे, उतनी ही तेजी से बंद होने लगे हैं।
यूटीयू से संबद्ध एक संस्थान एमबीए कोर्स वापस कर चुका है। कई संस्थान भी ऐसा करने वाले हैं। विवि के मुताबिक 25 प्रतिशत कॉलेजों में पांच साल पहले तक एमबीए की सभी सीट फुल रहती थीं, लेकिन अब खाली हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ वर्षों में देश के बिगड़े आर्थिक हालात के चलते प्लेसमेंट का ग्राफ नीचे गिरा है।
इस बीच बैंकों में भारी तादाद में सरकारी नौकरियां निकलने से भी युवाओं में एमबीए का क्रेज कम हुआ है।
नौकरी की गारंटी न मिलने से छात्रों ने मोड़ा मुंह
आईटी और इंश्योरेंस सेक्टर में विशेषज्ञता वाले कोर्स न होना भी एक वजह कही जा सकती है।
दूसरी ओर, कॉलेजों में भारी शुल्क के बावजूद नौकरी की गारंटी न मिलने से भी छात्रों ने एमबीए से मुंह मोड़ लिया है।
विवि से संबद्ध कालेजों में एमबीए का ग्राफ नीचे जा रहा है। हालांकि अभी तक केवल एक संस्थान ने एमबीए की मान्यता वापस की है, लेकिन विवि से संबद्ध 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रबंधन संस्थानों में एमबीए संघर्ष कर रहा है। - डॉ. आशीष उनियाल, उपकुलसचिव, यूटीयू
CAT में भी घट रहा रुझान
एमबीए के प्रति युवाओं की बेरुखी से प्रबंधन कोर्स में दाखिले के लिए होने वाली सबसे बड़ी परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट के लिए भी रुझान में कमी दर्ज की जा रही है।
कभी 2.68 लाख छात्र जिस परीक्षा में बैठते थे, अब संख्या घटकर 1.98 लाख तक आ पहुंची है। कैट की परीक्षा वर्ष 2009 में ऑनलाइन हुई।
पहले साल कुछ दिक्कतों के बाद वर्ष 2010 और 2011 में इस व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ। 2011 में देशभर से दो लाख नौ हजार अभ्यर्थी एग्जाम में बैठे थे, जो वर्ष 2012 में दो लाख सात हजार पर आ गए।
वर्ष 2013 में यह संख्या और गिरकर एक लाख 98 हजार हो गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक वर्ष 2005 से 2009 के बीच कैट एग्जाम का खासा क्रेज देखा गया था। वर्ष 2008 में सर्वाधिक दो लाख 68 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
अभ्यर्थियों की गिरती संख्या के लिए आर्थिक हालात, बैंकिंग, इंश्योरेंस और आईटी सेक्टर में बूम को बताया जा रहा है।
टीसीएस कंपनी कराएगी कैट कैट परीक्षा का आयोजन अब टीसीएस कंपनी कराएगी। टीसीएस इससे पहले आईबीपीएस की बैंक भर्ती परीक्षा करा चुकी है, जिसमें 32 लाख युवा बैठे थे।
माना जा रहा है कि अब परीक्षा में कई परिवर्तन हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कठिनता का स्तर काफी हद तक कम हो सकता है।
इसके अलावा टीसीएस कंपनी का अच्छा नेटवर्क होने से देशभर में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ना भी तय माना जा रहा है।
कैट परीक्षा में अब चुस्ती आ सकती है। निश्चित तौर पर नई कंपनी को परीक्षा की जिम्मेदारी मिलने के बाद पेपर का पैटर्न चेंज हो जाएगा। इसके अलावा अब यह परीक्षा एक या दो दिन में संपन्न हो जाएगी। - अमित मित्तल, कैट विशेषज्ञ