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रिसर्च के लिए एलयू देगा स्कॉलरशिप

Thu, 24 Apr 2014 04:02 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय अब स्टूडेंट्स को रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप देगा। यह लाभ पहले 30 स्टूडेंट्स को दिया जाएगा। पीएचडी करने वाले रिसर्च स्कॉलर, जिन्हें अब तक कहीं से वित्तीय मदद नहीं मिल रही है।
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मेधावियों को तीन साल तक यह स्कॉलरशिप मिलेगी। पहले साल 10 हजार रुपये, दूसरे साल 11 हजार और तीसरे साल 12 हजार रुपये महीने राशि दी जाएगी।

वहीं, तीन शिष्यों के साथ-साथ रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए गुरुजी को भी डेढ़ से दो लाख रुपये दिए जाएंगे। रिसर्च ग्रांट टू टीचर के तहत शिक्षकों को छोटे रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए मदद दी जाएगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में रिसर्च काउंसिल के चेयरमैन प्रो. विभूति राय ने बताया कि एलयू की रिसर्च स्कॉलरशिप के लिए स्टूडेंट्स के चयन नियम तैयार किए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि इससे स्टूडेंट को पीएचडी करने में काफी आसानी होगी। उनके लिए धन की कमी आड़े नहीं आएगी। स्टूडेंट्स को एलयू जहां सीधे वित्तीय मदद देगा।

वहीं उनके रिसर्च टॉपिक के अनुसार विभागों में उनके लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध करवाएगा। विभागों को भी रिसर्च ग्रांट के रूप में मदद दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि एलयू में रिसर्च को ढंग से बढ़ावा मिले।

प्रो. राय कहते हैं कि अभी रिसर्च में हम बेहतर कर रहे हैं लेकिन आगे और अच्छा करें, इसके लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही रिसर्च ग्रांट टू टीचर्स भी शुरू की जा रही है।

इसके तहत टीचर्स को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए करीब डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक रिसर्च ग्रांट दी जाएगी। प्रो. राय कहते हैं कि यंग टीचर्स को प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना शुरू की गई है।

टीचर्स के रिसर्च प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करने के बाद उन्हें यह वित्तीय मदद दी जाएगी। इससे एलयू में रिसर्च का अच्छा माहौल बनेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉलरशिप तो पीएचडी में आसानी मिलेगा से दाखिला
एलयू में पीएचडी के नए ऑर्डिनेंस बनकर तैयार हो गया है। जल्द ही इन्हें फैकल्टी बोर्ड, एकेडमिक काउंसिल और कार्यपरिषद से मंजूरी दिलाने की औपचारिकता पूरी करने के बाद लागू कर दिया जाएगा।

इस बार लखनऊ विश्वविद्यालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की स्कॉलरशिप, सीएसआईआर की स्कॉरशिप, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की स्कॉरशिप और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की स्कॉलरशिप, इंदिरा गांधी नेशनल स्कॉलरशिप, राजीव गांधी व मौलाना आजाद जैसी राष्ट्रीय स्तर की स्कॉलरशिप पाने वालों को सीधे दाखिला दिया जाएगा।

एलयू प्रशासन की मंशा है कि ऐसे स्टूडेंट, जिन्हें सीधे स्कॉलरशिप ग्रांट मिल रही है, उन्हें प्रमोट किया जाए। उन्हें दाखिले में वरीयता देकर प्रोत्साहित किया जाए।

एलयू में रिसर्च काउंसिल के चेयरमैन प्रो. विभूति राय का कहना है कि पीएचडी का ऑर्डिनेंस यूजीसी रेग्युलेशन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय इस बार दूसरे रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों को अपने यहां रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स का जाइंट सुपरवाइजर बनाने की अनुमति देगा। अभी लखनऊ विश्वविद्यालय ने 14 रिसर्च इंस्टीट्यूट व शैक्षिक संस्थानों से एमओयू कर रखा है।

अब एलयू में रिसर्च में इनरोल होने वाले स्टूडेंट अपने टॉपिक के अनुसार इन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पीएचडी कर सकेंगे। वहीं, कम से कम दो साल बाद ही अब कोई स्टूडेंट अपनी पीएचडी जमा कर सकेगा।

यूनिवर्सिटी में पीएचडी स्टूडेंट के रूप में वे चार साल में अपनी पीएचडी पूरी कर सकता है इसके बाद अगर उसकी पीएचडी पूरी न हुई तो आगे एक-एक साल के लिए छह या सात वर्षों तक उसे पीएचडी पूरी करने का समय दिया जाएगा।

सूत्रों की मानें, तो पीएचडी ऑर्डिनेंस एलयू के कुलपति डॉ. एसबी निमसे को तैयार कर दे दिए गए हैं। अब इसे विभिन्न चरणों से पास करवाकर जल्द लागू करने की कोशिश की जा रही है।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन की मंशा है कि पीएचडी में ऐसे नियम बनें, जिससे स्टूडेंट गुणवत्तापरक शोध के लिए काम करें।
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