एलयू में अब कॉलेजों को दी गई मान्यता (संबद्घता) की स्क्रीनिंग की जाएगी। कार्यपरिषद में मान्यता पर अंतिम मुहर लगाने से पहले एक चार सदस्यीय कमेटी दोबारा जांच करेगी।
अगर सब कुछ सही पाया गया तो उसे कार्यपरिषद का अनुमोदन दिलाने के बाद मान्यता दे दी जाएगी और अगर जांच में कुछ कमी पाई गई तो उन्हें मान्यता नहीं मिल पाएगी।
स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज में एलएलबी प्रथम सेमेस्टर (त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम) में निर्धारित सीटों से दोगुने दाखिले का मामला पकड़े जाने के बाद अब यूनिवर्सिटी प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
विवि ने जो कमेटी बनाई है, उसने पहली ही जांच में कार्यपरिषद में जिन नौ कॉलेजों की मान्यता को अनुमोदन दिया जाना था उनका प्रकरण यह कहकर वापस कर दिया कि इनमें से एक सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के जमीन के कागज पूरे नहीं थे।
कमेटी के सख्त रूख से साफ है कि अब एलयू में मान्यता के लिए खेल कर पाना आसान नहीं होगा।
एलयू प्रशासन ने अब नई व्यवस्था के तहत जो चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है।
उसमें नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ. सारनाथ सिंह और विधि संकाय के डॉ. आनंद कुमार विश्वकर्मा और रजिस्ट्रार शामिल हैं।
यह कदम एलयू प्रशासन ने इसलिए उठाया ताकि जो कमेटी मान्यता देने के लिए कॉलेज का निरीक्षण करने जा रही है, उसकी रिपोर्ट सत्यापित की जा सके।
स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज प्रकरण हो या फिर स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज में सीटों से निर्धारित संख्या में छात्रों को दाखिला देने का मामला हो। इस पूरे प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन की भी खासी किरकिरी हुई है।
ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान्यता के प्रकरण को डबल क्रॉस चेक करने की फूलप्रूफ व्यवस्था कर दी है। अब किसी कॉलेज को दो-दो कमेटियों की आंख में धूल झोंकना आसान नहीं होगा।
अब मान्यता देने के लिए जो कमेटी कॉलेज के प्रकरण की जांच कर रही है उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है, अगर कार्यपरिषद में उसकी ओर से की गई मान्यता की संस्तुति के प्रकरण को दूसरी कमेटी क्रॉस चेक में गड़बड़ पाती है तो उसकी शुचिता पर भी सवाल खड़े होंगे।
अभी तक कार्यपरिषद मान्यता दे रही कमेटी की रिपोर्ट को सही मानते हुए अपनी संस्तुति दे देती थी लेकिन अब इस दूसरी कमेटी के क्लीयरेंस के बाद ही मान्यता मिल पाएगी।
ऐसे में अब मान्यता के लिए किसी भी तरह का खेल कर पाना कॉलेजों के लिए आसान नहीं होगा।