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4 अक्तूबर को थी सुनवाई, 9 को भेजा पत्र

Sat, 12 Oct 2013 02:20 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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एलयू में सोशल वर्क विभाग में दलित छात्रा गरिमा चंद्रा से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनकी सहपाठियों ने अभद्रता की थी।
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बीते साल दिसंबर में हुई इस घटना पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पायी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले में कोई ठोस कार्रवाई करने से कतरा रहा है। इस प्रकरण पर मांगी जा रही सूचनाओं पर भी वह गोल-मोल जवाब दे रहा है।

छात्रा के पक्ष में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) उतर आया है और उसका कहना है कि अगर विवि प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो हम आंदोलन तेज कर देंगे।

आइसा के कैंपस सचिव नितिश कनौजिया का कहना है कि इस मामले में गठित कमेटी द्वारा क्या कार्रवाई की गई इसका आज तक कुछ पता ही नहीं चला।

बीते चार महीने से इस मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी जा रही है लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा।

नितिश कहते हैं कि सूचना न मिल पाने पर बीती 24 जुलाई को इस मामले में अपील दायर की गई थी। इसके बाद 21 सितंबर को इस मामले पर विवि प्रशासन ने सुनवायी तय की।
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मगर बाद में इसे रद करते हुए तारीख आगे बढ़ा दी। इसके बाद 4 अक्तूबर को इस मामले पर सुनवाई होनी थी लेकिन इसकी सूचना विकासनगर पोस्ट ऑफिस से 9 अक्तूबर को पत्र पोस्ट कर जानकारी दी गई।
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आखिर यह मजाक नहीं तो क्या है। अब इस मामले पर वह राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।

इधर एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय कहते हैं कि सुनवाई की तारीख बीतने के बाद पत्र भेजना गलत है। इसमें कहां गलती हुई है उसे देखकर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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