एलयू के रिसर्च को अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। इसके लिए सात सदस्यीय रिसर्च काउंसिल का गठन किया गया है।
भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विभूति राय को इस रिसर्च काउंसिल का चेयरपर्सन बनाया गया है।
यह काउंसिल यूनिवर्सिटी में टीचर्स व रिसर्च स्कॉलर्स की मदद करेगी और सेंट्रल रिसर्च फैसेलिटी की सुविधा उपलब्ध करवाएगी।
रिसर्च के लिए कहां-कहां से फंड जुटाए जा सकते हैं। इसकी भी जानकारी देगी।
वहीं, यूनिवर्सिटी में अलग-अलग विभागों में कौन-कौन से रिसर्च चल रहे हैं, इसकी ब्रांडिंग करेगी व इंटरडिस्प्लिनरी रिसर्च को बढ़ावा देगी।
रिसर्च काउंसिल के चेयरपर्सन राय ने बताया कि सबसे पहले सभी विभागों में चल रहे रिसर्च की सूची तैयार की जाएगी। इनमें से अच्छे रिसर्च की ब्रांडिंग करेंगे।
वहीं, यूनिवर्सिटी के टीचर्स के प्रोजेक्ट्स भी डिस्प्ले किए जाएंगे। इसके अलावा रिसर्च के लिए फंड जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। कई बार टीचर व रिसर्च स्कॉलर अच्छे टॉपिक पर रिसर्च करना चाहते हैं।
लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि वह कहां-कहां से मदद लें। इसके लिए हम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) व यूनेस्को आदि नेशनल व इंटरनेशनल फंडिंग एजेंसी से फंड लेने की जानकारी भी देंगे।
प्रो. राय का कहना है कि अभी यूनिवर्सिटी में रिसर्च के लिए कोई सेंट्रल फैसेलिटी नहीं है। अगर कोई बड़ा इक्युपमेंट किसी विभाग में रखा है तो उसे दूसरे विभाग में टीचर अपने रिसर्च में प्रयोग कर सकते हैं।
मान लीजिए कि बायो केमेस्ट्री डिपार्टमेंट में कोई अच्छा इक्युपमेंट रखा है तो उसे फिजिक्स व केमेस्ट्री के टीचर भी रिसर्च में प्रयोग कर सकेंगे। इसके अलावा हमारा फोकस इंटरडिस्प्लिनरी रिसर्च पर होगा।
इसमें सभी विभाग के स्टूडेंट व टीचर मिलकर एक संयुक्त विषय पर शोध कर सकेंगे। वहीं, रिसर्च जनरल पोर्टल जैसे साइंस डायरेक्ट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
ताकि किसी भी टीचर का रिसर्च प्रतिष्ठित जनरल में छपे तो उसे यहां पर दूसरे टीचर व स्टूडेंट्स भी जान सकें।