राजधानी में शिक्षा के स्तर को लेकर जिम्मेदार विभाग कितने उदासीन हैं, उसका पता इससे चलता है कि इस साल यूपी बोर्ड द्वारा ब्लैक लिस्टेड कॉलेजों की सूची आ चुकी है।
इसमें एक को छोड़कर पिछले साल एफआईआर वाले एक भी कॉलेज का नाम नहीं है। इससे साफ है कि ब्लैक लिस्टेड कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाने की हरी झंडी मिल जाएगी।
जबकि यूपी बोर्ड परीक्षा की केंद्र नीति के अनुसार, काली सूची में डाले गए कॉलेजों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता है।
ध्यान रहे कि पिछले वर्ष की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान कई कॉलेजों पर अनियमितता के चलते तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
साथ ही इन कॉलेजों को अगली बोर्ड परीक्षा के लिए काली सूची में डालने का दावा भी किया था। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बोर्ड को काली सूची में कॉलेजों का नाम भेजने संबंधी दस्तावेज नहीं मिल रहेे हैं।
जॉइंट डायरेक्टर (जेडी) भी ऐसी सूचना से इन्कार कर रही हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं इन विद्यालयों को काली सूची में डालने की संस्तुति बोर्ड को भेजी ही न गई हो।
हालांकि तत्कालीन डीआईओएस उमेश त्रिपाठी का दावा है कि उन्होंने सभी कॉलेजों को काली सूची में डालने के लिए बोर्ड को पत्र लिखा था।
कॉलेज को बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनाने के पीछे प्रबंधक कई कारणों से आतुर रहते हैं पहला- बोर्ड परीक्षा में केंद्र बनना प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है। दूसरा बोर्ड परीक्षा में लड़कियों को स्व:केंद्र की सुविधा मिलती है।
ऐसे में अगर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया तो फिर वहां की छात्राओं की मदद भी की जा सकती है। तीसरा कारण साठगांठ कर छात्रों को नकल सामग्री उपलब्ध कराना होता है।
पिछली बोर्ड परीक्षा के दौरान महेश सिंह सरस्वती व सेंट लॉरेंस इंटर कॉलेज, फ्लोरेंस नाइटेंगल इंटर कॉलेज सहित आधा दर्जन से ज्यादा कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए काली सूची में डालने की बात कही गई थी।
लेकिन इस बार जारी काली सूची में सेंट लॉरेंस को छोड़ कई विवादित कॉलेजों के नाम गायब हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में परीक्षा का काम देख रहे कर्मचारी से जब पिछली बार काली सूची के लिए एफआईआर वाले कॉलेजों के नाम भेजने संबंधी जानकारी मांगी गई तो उसका कहना था कि उसे ऐसी कोई फाइल नहीं मिली।