एलयू में बीते छह महीने से बिना मानदेय के ही रिसर्च कर रहे स्टूडेंट को बुधवार को बड़ी राहत मिली। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन्हें दो महीने का मानदेय अपने पास से देने का फैसला किया है।
वहीं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र भेजकर इन स्टूडेंट्स का बकाया मानदेय भेजने की मांग की है। प्रति कुलपति प्रो. एके सेन गुप्ता ने बुधवार को इस मामले पर बैठकर कर रिसर्च कर रहे इन स्टूडेंट्स की कठिनाई दूर करने का फैसला लिया।
एलयू में जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) के तहत रिसर्च कर रहे स्टूडेंट को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से न्यूनतम 18 हजार रुपए महीने मानदेय दिया जाता है।
ताकि वह अपना रिसर्च वर्क ढंग से कर सकें लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रहे स्टूडेंट्स को बीते अगस्त, 2013 के बाद से मानदेय नहीं दिया गया।
स्टूडेंट्स ने कई बार विवि प्रशासन को इस मामले पर पत्र भी लिखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार को छात्रों ने इस मामले पर जोरदार प्रदर्शन किया।
उन्होंने विवि प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा को रखते हुए कहा कि आखिर वह किस तरह अपना रिसर्च वर्क करें। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें बताया कि यूजीसी को वे कई बार पत्र भेज चुके हैं लेकिन उन्हें मानदेय नहीं मिला।
फिलहाल, छात्रों के विरोध को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब अपने पास से दो महीने का मानदेय स्टूडेंट को देने का फैसला किया है।
इसके बाद जब छात्रों का छह महीने का मानदेय आए तो यूनिवर्सिटी अपनी ओर से दी गई रकम काटते हुए शेष छात्रों को दे देगी।