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58वें दीक्षांत समारोह में 33 मेधावियों को मिले मेडल व उपाधि

Mon, 01 Feb 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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चेहरे पर सफलता की चमक तो आंखों में सुनहरे भविष्य का सपना। मंच पर पहुंच रहे हर मेधावी का उत्साह उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था। लखनऊ विश्वविद्यालय के 58वें दीक्षांत समारोह में रविवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
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कुलाधिपति राज्यपाल राम नाईक और मुख्य अतिथि केंद्रीय विज्ञान एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने मंच से कुल 32 मेधावियों को मेडल और एक को डीलिट की उपाधि प्रदान की।

विवि का सबसे प्रतिष्ठित चांसलर गोल्ड मेडल एलएलबी के छात्र अमिताभ श्रीवास्तव के नाम रहा। हालांकि, वह खुद दीक्षांत में शामिल नहीं हो सके इसलिए मेडल उनकी मां अनुराधा श्रीवास्तव को दिया गया।
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इसके अलावा एलएलबी के छात्र अपूर्व देव व एमबीई की छात्रा परिवश फातिमा को चांसलर सिल्वर मेडल, रजत शुक्ला को चक्रवर्ती गोल्ड मेडल दिया गया।

सर्वाधिक 12 मेडल एमएससी की टॉपर सामिया अहमद की झोली में गिरे। वहीं, लड़कों में एमए एआईएच के अरुण कुमार ने सर्वाधिक नौ और एमएससी फिजिक्स के अजेंद्र सिंह ने सात मेडल पाए।

छात्रों के लिए खतरे की घंटी : राम नाईक

कुलाधिपति राम नाईक ने कहा कि दीक्षांत में मेडल पाने वाले कुल 106 मेधावियों में 78 छात्राएं और मात्र 28 छात्र हैं। इस हिसाब से मेडल पाने वालों में 74 फीसदी छात्राएं शामिल हैं जो कि छात्रों के लिए खतरे की घंटी है। यदि ऐसा ही रहा तो कहीं छात्रों को आरक्षण की जरूरत न पड़ जाए।

इससे यह भी साफ पता चलता है कि यदि छात्राओं को पढ़ने का अवसर मिले तो वह किसी से कम नहीं। राम नाईक ने कहा कि पांच साल बाद एलयू 100 साल को हो जाएगा।

उनकी इच्छा है कि शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन में एलयू सबसे ऊपर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह खुद पढ़ाई में काफी अच्छे थे, लेकिन कभी पढ़ाई के लिए मेडल नहीं मिल सका। जीवन में आगे बढ़ने के लिए संकल्प की जरूरत होती है।
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एक साल में विश्वविद्यालय की गाड़ी पटरी पर आई

राम नाईक ने मेधावियों से कहा अब उनके सामने खुला आसमान है। अभी तक उन्होंने समाज से लिया है अब उसे देना सीखना होगा।

राम नाईक ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि पिछले एक साल में सूबे के विश्वविद्यालयों की गाड़ी पटरी पर आने लगी है।

राम नाईक ने मुख्य अतिथि डॉ. हर्ष वर्धन के दीक्षांत भाषण की किताब छपवाकर सभी छात्र-छात्राओं को डिग्री के साथ देने का सुझाव खुले मंच से कुलपति प्रो. निमसे को दिया।

साथ ही यह भी कहा कि वह भाषण सिर्फ मेडल धारियों नहीं बल्कि सभी डिग्री पाने वालों को दिया जाए।
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