बिन दूल्हे और दुल्हन के बारात सजे तो कैसा लगेगा। कुछ ऐसा ही नजारा था एलयू की टॉपर्स बैठक का, जहां मेधावी ही नदारद थे। 197 टॉपर्स में मात्र 2 बैठक में पहुंचे।
विवि प्रशासन का कहना है कि कई मेधावियों के संपर्क सूत्र व पते बदल जाने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया, जबकि सूत्रों की मानें, तो सभी टॉपर्स को न्यौता ही नहीं दिया गया।
विवि के पास 197 टॉपर्स में कुछ ही छात्रों के फोन व पते हैं, जिनसे संपर्क कर औपचारिकता पूरी कर ली गई। तय समय के अनुसार अतिथि के रूप में जब नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह इस बैठक में संबोधित करने पहुंचे तो यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को अपनी कमी छुपाने के लिए बहाने करने पड़े।
बाद में किसी तरह बीपीएड और एमपीएड के कुछ स्टूडेंट्स को मालवीय सभागार में एकत्रित किया। अतिथि ने मौजूद स्टूडेंट्स को लखनवी तहजीब, इसके इतिहास और यहां की खास बातों से अवगत कराया।
मुख्य नियंता प्रो. मनोज दीक्षित ने टॉपर्स अकेडमी के स्टूडेंट्स की बैठक सोमवार को सुबह 11 बजे लखनऊ विश्वविद्यालय के एपी सेन सभागार में रखी थी।
इस अकेडमी में कुल 197 स्टूडेंट्स का नाम है लेकिन 12.30 बजे तक इनमें से कोई भी स्टूडेंट नहीं पहुंचा। लगभग 12.30 के आसपास इनमें से दो स्टूडेंट्स सभागार में पहुंचे।
इस आयोजन का उद्देश्य था कि यूनिवर्सिटी की प्रगति में मेधावी किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं। अन्य कोर्सेज के छात्रों को सभागार में बैठाकर किसी तरह व्यवस्था की गई।
इस मौके पर नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह ने लखनऊ के इतिहास पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह शहर बहुत ही खूबसूरत है। उन्होंने टीले वाली मस्जिद से लेकर रूमी दरवाजा, इमामबाड़ा, सफेद बारादरी सहित यहां की विभिन्न एतिहासिक इमारतों पर चर्चा की।
उन्होंने यहां की तहजीब से स्टूडेंट्स को वाकिफ कराने के साथ ही पुराने समय के लखनऊ की खूबसूरती भी बयां की। उन्होंने छात्रों से शहर की सभ्यता व संस्कृति को संजोने का आहन किया।
पहला प्रयास ही हुआ विफल
मालूम हो कि लखनऊ यूनिवर्सिटी ने 2007 में टॉपर्स अकेडमी का गठन किया था। इस एकेडमी में विभिन्न विषयों के टॉपर्स को शामिल किया गया।
पिछले छह साल से यह अकेडमी पूरी तरह से बेकार पड़ी थी। इस साल मुख्य नियंता प्रो. मनोज दीक्षित ने एक बार फिर से इस एकेडमी को सक्रिय करने की ठानी।
200 साल पुराना कुआं देखने पहुंचे नवाब जाफर मीर
टॉपर्स अकेडमी की बैठक में शामिल होने पहुंचे नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला ने विश्वविद्यालय परिसर में जेके ब्लॉक के पीछे हाल ही में मिला 200 साल पुराना कुआं भी देखा।
कुआं ध्यान से देखने के बाद उन्होंने मौके पर ही मुख्य नियंता प्रो. मनोज दीक्षित से उसके संरक्षण को लेकर चर्चा की। नवाब जाफर मीर ने कुएं के संरक्षण के संदर्भ में अपने सुझाव दिए।