चार राज्यों में कांग्रेस की बुरी शिकस्त के बाद भले ही सोनिया गांधी के पार्टी की कमान फिर से संभालने की बात जोर पकड़ रही हो, मगर कांग्रेस अध्यक्ष खुद को अति सक्रिय कर राहुल गांधी की भूमिका को कम करने के कतई पक्ष में नहीं हैं।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक हार के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जिम्मेदारी कम नहीं होगी, बल्कि और बढ़ सकती है। यह माना जा रहा है कि पार्टी से प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार कोई दूसरा नहीं, बल्कि राहुल ही होंगे।
लोकसभा चुनाव को लेकर अभियान छेड़ने के लिए राहुल जल्द ही देशव्यापी दौरा शुरू कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वह पार्टी को आम आदमी से जोड़ने के लिए सदस्यता अभियान भी दुबारा शुरू करेंगे।
चार राज्यों की हार को कांग्रेस अध्यक्ष ने गंभीरता से लिया है। इसलिए आत्ममंथन और समीक्षा बैठकों का दौर सोनिया ने खुद शुरू किया है। मगर इसे आगे राहुल ही बढ़ाने वाले हैं।
सूत्रों ने बताया कि समीक्षा का काम खत्म होने के बाद राहुल ही संगठन में फेरबदल करेंगे। संगठन की जिम्मेदारी संभालने की बात राहुल कर रहे हैं। मगर पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि संगठन के साथ साथ पार्टी अध्यक्ष अब राहुल को फ्रंटफुट पर रखने के पक्ष में लग रही हैं।
एक नेता ने कहा कि अब नतीजे चाहे जो हों, लेकिन राहुल को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे लाना होगा। पार्टी के नेताओं की राय है कि राहुल के अलावा पार्टी के पास और कोई विकल्प भी नहीं है।
आम आदमी को जोड़ने की मुहिम चलाएंगे राहुल
सूत्रों का कहना है कि चारों राज्यों में बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता निराश हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाने के लिए राहुल देशभर में दौरा कर सकते हैं।
कांग्रेस के रणनीतिकार भी मानते हैं कि राहुल का और सक्रिय होना जरूरी है। माना जा रहा है कि ‘आप’ पार्टी की जीत से सबक लेने की बात कह चुके राहुल अपने अभियान के तहत आम आदमी को कांग्रेस से जोड़ने की कोशिश करेंगे।