एलयू में 75 प्रतिशत उपस्थिति के नियम को लागू करवाने में यूनिवर्सिटी प्रशासन के ही पसीने छूट गए हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं।
डीन फैकल्टी ऑफ आर्ट्स प्रो. रश्मि पांडेय ने सोमवार को आर्ट्स फैकल्टी के सभी विभागाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली जिसमें मुद्दा था कि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले स्टूडेंट्स को पीजी के सेमेस्टर एग्जाम में बैठने से रोक दिया जाए।
मगर इसमें जब विभागाध्यक्षों ने क्लासरूम की उपस्थिति का ब्यौरा पेश किया तो डीन के भी होश उड़ गए और उन्होंने इस बैठक को बेनतीजा घोषित करते हुए इसे आगे के लिए टाल दिया। फिलहाल यूनिवर्सिटी का यह नियम इस बार भी कागजों पर ही रहेगा, इसे सख्ती से लागू करवा पाना यूनिवर्सिटी के बस की बात नहीं है।
सिर्फ तीन विभाग ही ऐसे थे जिन्होंने इस नियम को अभी से लागू करवाने की मांग उठाई। लखनऊ विश्वविद्यालय में सोमवार को आर्ट्स फैकल्टी के विभागाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।
कितने स्टूडेंट्स को रोकेंगे परीक्षा में बैठने से
बैठक में लोक प्रशासन विभाग, प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग और राजनीति शास्त्र विभाग ने कहा कि पीजी की सेमेस्टर परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों को सेमेस्टर एग्जाम में बैठने से रोका जाए। बाकी विभागाध्यक्षों ने उपस्थिति के जो आंकड़े पेश किए वह काफी चौंकाने वाले थे।
इसके अनुसार सिर्फ 22 प्रतिशत स्टूडेंट ही ऐसे हैं जिनकी क्लासरूम में उपस्थिति 75 फीसदी या इससे ऊपर है। वहीं 26 फीसदी स्टूडेंट ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति 50 प्रतिशत से लेकर 74 फीसदी के बीच है।
वहीं 52 प्रतिशत स्टूडेंट ऐसे हैं जिनकी क्लासरूम में उपस्थिति 50 प्रतिशत से लेकर शून्य तक भी है। ऐसे में आखिर कितने स्टूडेंट्स को परीक्षा देने से रोका जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार से पीजी में इंटरनल असेसमेंट सिस्टम लागू किया है।
इसके तहत उपस्थिति के भी पांच अंक हैं। मगर यूनिवर्सिटी में विभागाध्यक्षों द्वारा पेश की गई हकीकत के बाद तो इसे अगर लागू करवाया गया तो बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स का एक साल बर्बाद हो जाएगा।
फिलहाल यूनिवर्सिटी में 75 प्रतिशत उपस्थिति को सख्ती से लागू करवा पाना अभी दूर की कौड़ी नजर आ रही है। बैठक में एलयू के परीक्षा नियंत्रक शैलेश शुक्ला भी मौजूद थे। उन्होंने भी यूनिवर्सिटी की हकीकत को समझा और बैठक में चुपचाप रहे।
फिलहाल 75 प्रतिशत उपस्थिति के नियम को लागू करवाने में आर्ट्स फैकल्टी की ओर से हाथ खड़े कर दिए गए हैं। अब सभी स्टूडेंट बिना उपस्थिति पूरी किए ही इम्तिहान देंगे और एलयू खामोश रहेगा।
परीक्षा से रोके गए 18 छात्रों को मिली थी छूट
शारीरिक शिक्षा विभाग में सेमेस्टर परीक्षा में 18 छात्रों को कम उपस्थिति के कारण रोक दिया गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर दिया था। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी।
शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया। इसमें कहा गया कि जब यूनिवर्सिटी प्रशासन विभाग की ओर से स्टूडेंट्स को रोके जाने के बावजूद परीक्षा में बैठने की अनुमति दे देता है तो फिर उपस्थिति का नियम क्यों लागू करने को कहा जा रहा है। मालूम हो कि कुछ वर्ष पहले लॉ में भी इससे पहले उपस्थिति को लेकर छात्रों द्वारा चुनौती दी गई थी और बाद में परीक्षा में शामिल हुए थे।
एलयू में 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले स्टूडेंट परीक्षा में शामिल नहीं किए जाएंगे। इसका आदेश कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने जारी करवाए थे। परीक्षा नियंत्रक शैलेश शुक्ला की ओर से जारी किए गए पत्र में साफ कहा गया था कि इससे कम उपस्थिति वाले परीक्षा में शामिल नहीं होंगे।
मगर इस बार भी यूनिवर्सिटी का यह नियम सिर्फ कागजों पर रह गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उपस्थिति का ब्यौरा लेने के निर्देश तो विभागों में दिए मगर इसकी ढंग से मॉनीटरिंग नहीं की गई।