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...तो इसलिए नहीं मिला LU को ए ग्रेड

Tue, 13 May 2014 11:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय को ए ग्रेड का दर्जा दिलाने को विवि प्रशासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर डाले फिर भी बी ग्रेड से ही संतोष करना पड़ा।
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इसके पीछे मुख्य कारण यह रहा कि बिल्डिंग, साफ-सफाई, मरम्मत पर तो रुपये बहाए गए लेकिन विवि का अहम भाग यानी एकेडमिक्स में पिछड़े ही साबित हुए।

शैक्षणिक गुणवत्ता, स्टूडेंट्स की सुविधाओं की ओर ध्यान ही नहीं गया। विश्वविद्यालय की लैब और लाइब्रेरी दोनों ही नैक मूल्यांकन पर खरे नहीं उतर सके।

प्रयोगशालाओं की हालत जर्जर और लाइब्रेरी भी ऑनलाइन नहीं है। अगर बिल्डिंगों के साथ ही लैब, लाइब्रेरी और कम्यूटरीकरण में भी सुधार किया जाता तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।
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नैक मूल्यांकन हो लेकर लविवि में पिछले छह महीने से काफी सरगर्मियां देखने को मिल रही थीं। मूल्यांकन को लेकर तैयारियां भी काफी जोर-शोर से हुईं।

हमेशा आर्थिक तंगी का रोना रोने वाले लविवि में नैक मूल्यांकन के लिए दिल खोलकर रुपया खर्च किया गया। नैक मूल्यांकन की तैयारियों पर विवि ने पांच करोड़ रुपये खर्च किए हैं पर पूरा खर्चा केवल भवन के रंग-रोगन और चमकाने में किया गया।

स्टूडेंट्स के हित या शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के नाम पर विश्वविद्यालय ने कोई ध्यान नही दिया। यह पैसा अगर विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुधारने पर लगाया जाता तो सूरत दूसरी हो सकती थी। प्रयोगशाला आधुनिक तो दूर उपकरणों तक का रोना रहता है।
ऑफलाइन ही होते परीक्षा से संबंधित कामलविवि ने एडमिशन प्रक्रिया की तरह परीक्षा संबंधी काम को ऑनलाइन करने की शुरुआत जल्द करने की बात कही थी। ऑनलाइन प्रक्रिया में स्टूडेंट्स को परीक्षा फॉर्म विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ही भरने का मौका मिलता।
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इसी तरह प्रवेश पत्र भी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मिल जाते। वर्ष 2014 की वार्षिक परीक्षाओं के लिए परीक्षा फॉर्म भरने के संबंध में आदेश जारी हो चुका है। परीक्षा फॉर्म ऑफलाइन ही भरे जाने हैं। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 13 फरवरी लास्ट डेट तय कर दी है।
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