देहरादून में स्कूली बच्चों को जादू का खेल दिखाने के नाम पर लाखों का खेल चल रहा है।
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खास बात यह है कि बिना किसी शासनादेश के रेडक्रॉस के नाम पर स्कूली बच्चों से जादू देखने का शुल्क वसूला जा रहा है। हरियाणा की एक एनजीओ इन दिनों जिले के स्कूलों में यह खेल दिखा रही है।
दून में जुटेगी 50 लाख से अधिक की रकम
राजधानी में स्कूलों की संख्या 1300 से अधिक है। इनमें लाखों बच्चे अध्ययनरत हैं। हर बच्चे से दस रुपए खेल देखने के लिए जमा कराए जा रहे हैं। इस तरह दून में ही 50 लाख से अधिक की रकम जुटने वाली है।
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खास बात यह है कि इस तरह का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से प्रदेशभर के स्कूलों में हो रहा है। लेकिन इसका पैसा जाता कहां है, कोई नहीं जानता।
हर माह लिया जाता है रेडक्रॉस शुल्क
स्कूली बच्चों के शुल्क में हर साल रेडक्रास सोसाइटी की मद में भी तय राशि दो रुपए ली जाती है। यह रकम सीधे सोसाइटी के खाते में जाती है। इसके बावजूद जादू के खेल में रेडक्रॉस के नाम पर वसूली शिक्षा विभाग पर सवाल खड़े करती है।
एनजीओ ने बनाई हैं चार टीम
जिले में हरियाणा की एनजीओ जादू दिखा रही है। एनजीओ ने यह खेल दिखाने के लिए चार टीमें बनाई हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों के स्कूलों में जा रही हैं। खेल दिखाने से पहले ये टीमें स्कूल प्रबंधनों को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से जारी अनुमति पत्र दिखा रही हैं।
आरटीई का हो रहा उल्लंघन
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत छह से आठवीं कक्षा तक के बच्चों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद बच्चों से जादू का खेल दिखाने के नाम पर धड़ल्ले से शुल्क वसूला जा रहा है, जो अधिनियम का उल्लंघन है।
जांच हो तो खुले घोटाला
बच्चों से खेल दिखाने के नाम पर वसूला जा रहा कागजों में पैसा पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन (पीटीए) द्वारा दान दी गई धनराशि के तौर पर दिखाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसमें से कुछ राशि तो सीधे अफसरों की जेब में जा रही है, जबकि बाकी का ड्राफ्ट विभाग को भेजा जा रहा है।
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