जयनारायण पीजी कॉलेज (केकेसी) के छात्र जल्द ही घर बैठे इनफ्लिबनेट (इन्फॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क सेंटर) के माध्यम से 77 हजार से अधिक ई-बुक्स और जर्नल्स पढ़ सकेंगे।
इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही प्रकार की किताबें और जर्नल शामिल हैं। कॉलेज में इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से काम चल रहा है।
दशहरा के बाद छात्रों को इनफ्लिबनेट के ई-कंटेन्ट एक्सेस करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे। शुरू में तो यह सुविधा केवल कॉलेज परिसर में ही उपलब्ध होगी। लेकिन दिसंबर से छात्र इंटरनेट के माध्यम से कहीं भी इसका प्रयोग कर सकेंगे।
इनफ्लिबनेट यूजीसी का एक स्वायत्त अंतर विश्वविद्यालय केंद्र है, जो देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को डिजिटल रूप में उच्च स्तरीय पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराता है।
जयनारायण पीजी कॉलेज हाल ही में इनफ्लिबनेट से जुड़ा है। कुछ ही समय पहले ही कॉलेज में वाईफाई के माध्यम से इंटरनेट सुविधा की शुरुआत की गई है।
आमतौर पर जिन विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों में यह सुविधा उपलब्ध है वहां के छात्र अपने कॉलेज परिसर में ही इसका प्रयोग कर पाते हैं।
लेकिन जयनारायण पीजी कॉलेज अपने छात्रों का यह सुविधा देने जा रहा है कि वे कहीं से भी इनफ्लिबनेट की ई-बुक्स और जर्नल्स का लाभ ले सकेंगे।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा ने बताया कि वर्तमान में उनके यहां लगभग 13 हजार छात्र और 375 से अधिक शैक्षिक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी हैं। इस सुविधा का लाभ इन सभी को मिलेगा।
वर्तमान में इनफ्लिबनेट के माध्यम से लगभग 77,855 ई बुक्स और जर्नल्स उपलब्ध होंगे। जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही तरह की पाठ्य सामग्री शामिल है।
इस सामग्री को पढ़ने के साथ ही डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सकता है। समय-समय पर इनफ्लिबनेट की इस सामग्री में नई बुक्स और जर्नल भी शामिल किए जाते हैं।
डॉ. एसडी शर्मा ने बताया कि आज कॉलेजों में सभी तरह की बुक्स और जर्नल्स की कॉपी छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं है। क्योंकि इनमें काफी महंगी किताबें और जर्नल भी होते हैं।
अगर कॉलेज किसी तरह से इनको अपने यहां लाता भी है तो उनकी सीमित कॉपी ही रख सकेगा। जबकि इंटरनेट के माध्यम से एक ही समय पर बहुत से लोग उस पाठ्य सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।
इस सुविधा के आने से शिक्षकों के लिए खुद को संबंधित विषय में अपडेट करने में सुविधा होगी। शिक्षक भी इंटरनेट पर उपलब्ध इस ई कंटेन्ट को पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ाएंगे जिसका लाभ छात्रों को भी मिलेगा।
क्योंकि शिक्षकों के पास जितनी अधिक और नई जानकारी होगी वह उतना बेहतर तरीके से छात्रों को पढ़ा सकेंगे।