राजधानी के ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी विश्वविद्यालय
के नए कुलपति के तौर पर प्रो. खान मसूद अहमद को राज्यपाल बीएल जोशी ने
सोमवार को नियुक्त किया।
वे प्रो. अनीस अंसारी से यह पद संभालेंगे।
राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिक पाटणकर ने बताया कि प्रो. खान का कार्यकाल
पद संभालने की तारीख से अगले तीन वर्ष के लिए होगा।
इस मौके पर अमर उजाला से बातचीत के दौरान प्रो. खान ने नए दायित्व को बेहद
महत्वपूर्ण बताया। कहा कि उनकी शिक्षा लखनऊ में ही हुई है।
वे पद ग्रहण
करते हुए तुरंत काम में लग जाएंगे। उनका प्रमुख लक्ष्य यहां विद्यार्थियों
को आकर्षित करते हुए उनकी संख्या बढ़ाना रहेगा।
प्रो. खान ने बताया कि वे
मूलत: बाराबंकी के रहने वाले हैं, और लखनऊ में नक्खास स्थित सेंट जोन्स
स्कूल में अपनी प्राथमिक शिक्षा उन्होंने ली। इसके बाद शिया इंटर कॉलेज
में पढ़े।
फैजाबाद में गवर्नमेंट इंटर
कॉलेज से 1969 में साइंस में इंटर किया। फिर लखनऊ लौट आए और मैथ्स, फिजिक्स
व स्टेट्स्टिक्स में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीएससी किया।
इस दौरान लाल
बहादुर शास्त्री हॉस्टल में रहे। इसके अलावा उन्हाेंने दिल्ली स्कूल ऑफ
इकोनॉमिक्स डीयू से एमफिल और 1989 में पीएचडी की।
वे 1996 में जामिया
मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिक्स विभाग में बतौर प्रोफेसर जुड़े
और वीसी के तौर पर नई नियुक्ति लेने तक वहीं कार्यरत हैं और समाज विज्ञान
विभाग संकाय में डीन बन चुके हैं।
इंटरनेशनल फाइनेंस एंड बैंकिंग के
विशेषज्ञ डॉ. खान ने ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी
विश्वविद्यालय में अपने विजन को लेकर बताया कि फिलहाल वे यहां के हालात
समझना चाहेंगे।
इसके बाद अपना विजन सामने रखेंगे। फिलहाल, उनका लक्ष्य यहां
जल्द कार्यभार संभालकर काम शुरू करना है। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही
लखनऊ पहुंचेंगे।