महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) प्रशासन की कार्य प्रणाली पर एक बार फिर से अंगुली उठी है, इस बार एनआईटी तीन स्थित केएल मेहता दयानंद महिला महाविद्यालय की बीएससी (नॉन मेडिकल) की 45 छात्राओं ने उन्हें कटघरे में खड़ा किया है।
छात्रा ममता, पारुल, सोनिया, मिन्नी, मन्नु, प्रिया, कविता, प्रिया, ज्योति ने अमर उजाला को बताया कि चार सेमेस्टर तक 70 फीसदी अंक हासिल करने वाली मेधावी छात्राओं को पांचवें सेमेस्टर की गणित विषय की परीक्षा में जीरो अंक एमडीयू की ओर से कैसे दिए जा सकते हैं। यह बड़े स्तर पर जांच का विषय है। इसमें दोषी को सामने लाना चाहिए, वरना एमडीयू की साख पर बट्टा लगता ही रहेगा।
कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाते हुए बताया कि एमडीयू के खिलाफ इस मामले पर कॉलेज प्रशासन आवाज उठाने तक से डर रहा है। 17 मई से लगातार 23 मई तक छात्राओं को कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रतिदिन यह कह कर टरकाया गया कि कल एमडीयू से बात होगी।
केएल मेहता दयानंद महिला महाविद्यालय की प्रधानाचार्या शुभ साधना सहाय ने कहा कि छात्राओं के विषय को लेकर एग्जाम कंट्रोलर से बातचीत जारी है। छात्राओं से पक्ष रखने को मना नहीं किया गया है, बल्कि एक साथ सभी छात्राओं को एमडीयू ले जाने से रोका गया है।
यह है कॉलेज की हकीकत
पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में कॉलेज की 56 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इसमें 45 छात्राओं को फेल कर दिया गया। हैरानी तब हुई है कि 40 छात्राओं के 70 फीसदी से अधिक अंक है। लेकिन उन्हें गणित में जीरो अंक मिले।