लाल दुर्ग में मोदी बनाम छात्रसंघ चुनाव की गूंज सुनाई दे रही है। लेफ्ट विचारधारा से प्रभावित छात्र संगठन व एनएसयूआई भी छात्रसंघ चुनावों के बहाने मोदी पर हमला बोल रहा है तो एबीवीपी, आइसा को तीन साल और एनएसयूआई को यूपीए के दस सालों का आइना दिखा रहा है।
कुल मिलकार जेएनयू छात्रसंघ चुनावों के तहत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी कैंपस से अधिक मोदी की योजनाओं व घोषणाओं को धोखा करार देते हुए मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में बृहस्पतिवार को चुनाव कमेटी ने छात्रसंघ चुनाव के अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के मुद्दों को लेकर मीडिया से रूबरू करवाया। जेएनयू अध्यक्ष पद की दौड़ में कुल सात प्रत्याशी मैदान में हैं।
आइसा : त्रिलोकपुरी दंगा, प्याज, एफटीआईआई, बीएचयू का मुद्दा उठाया
आइसा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय कुमार छात्र संघ चुनावों में कैंपस से अधिक त्रिलोकपुरी दंगा, प्याज, एफटीआईआई व बीएचयू के प्रिंसिपल के विवाद को उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है, जिसके लिए सेंट्रल एजुकेशन बिल ला दिया गया। हालांकि छात्रों को हॉस्टल समेत कम पैसे में बेहतर शिक्षा दिलाने का वादा भी किया।
एनएसयूआई : भूमि अधिग्रहण बिल से एबीवीपी को घेरा
एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार जम्मू के मंसूद अहमद ने मोदी बनाम लेफ्ट संगठनों को आइना दिखाया। मंसूद ने कहा कि आइसा तीन सालों से लगातार जीत रही है, लेकिन हॉस्टल की समस्या सबसे बड़ा मुद्दा है। वहीं, एबीवीपी को घेरने के लिए मोदी पर जन धन योजना, पंद्रह लाख खाते में जमा करवाने आदि को गिनवाया। संसद में भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष (कांग्रेस )के वाकआउट पर वाहवाही भी लूटी।
एबीवीपी : विरोध नहीं, विकास नारे से गिनवायी उपलब्धियां
वामपंथी छात्र संगठनों और एनएसयूआई के हमले को झेलते एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार गौरव कुमार झा ने विरोध नहीं विकास नारे के साथ पिछले वर्षों में कैंपस में किए गए कार्यों व उपलब्धियों को गिनवाया। उन्होंने कहा कि केंद्र और छात्रसंघ चुनाव अलग हैं। इसलिए हमें कैंपस की कमियों के आधार पर वोट मांगने चाहिए।
एसएफआई: आरएसएस बनाम मोदी
एसएफआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पारीतोष नाथ ने कैंपस के मुद्दों की बजाय आरएसएस बनाम मोदी से मतदाताओं को रिझाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया कोई नारा नहीं है। क्योंकि आज भी लोकतंत्र में बोलने की आजादी नहीं है। हालांकि आखिर में हॉस्टल के मुद्दे पर भी बात कही।
बीएपीएसए : ब्राह्मणवाद पर किया कटाक्ष
पहली बार छात्रसंघ चुनावों में उतरी बीएपीएएस (बिरसा अंबेडकर फूले स्टूडेंट एसो.) के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चिन्मय महानंद ने छात्रों की बजाय ब्राह्मणवाद व हिंदोवाद पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कैंपस में आरक्षित व दलित छात्रों को मार्क्स नहीं मिलते हैं। इसके चलते दलित छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ चले जाते हैं।
डीएसएफ: मोदी और हॉस्टल की कमी को मुद्दा बनाया
डीएसएफ से कारगिल से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी फ्याज अहमद ने कहा कि मोदी के चलते शिक्षा का स्तर खराब हो रहा है। वहीं, हॉस्टल की कमी केचलते लड़कियां दाखिला मिलने के बाद भी कैंपस छोड़कर जा रही हैं। दूर-दराज से आने वाली छात्राएं कुछ सपने लेकर आती हैं, लेकिन उन्हें हॉस्टल में सीट न मिलने के चलते छोड़ना पड़ता है।