आईआईटी (इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी) और आईएसएम (इंडियन स्कूल आफ माइंस) में दाखिले को हुई जेईई एडवांस परीक्षा में उत्तराखंड के होनहारों ने भी कामयाबी पाई।
कानपुर और रुड़की जोन में बंटा होने के कारण प्रदेश का टॉपर तो सामने नहीं आ पाया, लेकिन देर शाम तक हल्द्वानी की प्रियंका जोशी 119 रैंक और निशांत शर्मा 767 रैंक के साथ सबसे आगे थे। जेईई एडवांस का परिणाम बृहस्पतिवार को सुबह ठीक दस बजे जारी हुआ।
आईआईटी ने चूंकि क्वालिफाइंग कटऑफ का क्राइटेरिया डाउन कर दिया था, इसलिए ज्यादा संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा में पास तो हुए लेकिन उत्तराखंड का ओवरऑल परिणाम गत वर्ष के मुकाबले कुछ कम रहा।
इस वर्ष देर शाम तक आए परिणामों में हल्द्वानी निवासी प्रियंका जोशी ने 119वीं रैंक हासिल की। कैंट निवासी छात्र निशांत शर्मा आल इंडिया 767 रैंक हासिल कर सबसे आगे थे। इसके बाद सामान्य श्रेणी में ही दून के पारस गुप्ता ने 2045, कुश गुप्ता 2357, प्रांजल बिष्ट 4013 रैंक के साथ आगे रहे। देर रात तक कई रैंक सामने नहीं आ पाई।
गत वर्ष के मुकाबले गिरा रिजल्ट
उत्तराखंड को वैसे तो दो हिस्सों में बांटा गया है। कुछ हिस्सा आईआईटी कानपुर जोन में आता है तो कई शहर आईआईटी रुड़की जोन में आते है। फिर भी गत वर्ष प्रखर गुप्ता ने परीक्षा में 175 और वैभव गुसाईं ने 655 रैंक हासिल की थी।
आईआईटी की ओर से जारी बोर्ड की प्रतिभागिता सूची के मुताबिक उत्तराखंड बोर्ड से 100 छात्र भी परीक्षा में क्वालिफाई नहीं कर पाए। हालांकि यहां पासआउट होने वाले सीबीएसई बोर्ड के छात्रों की संख्या ज्यादा रही।
चार आईआईटी में सबसे ज्यादा मारामारी
जेईई एडवांस का परिणाम जारी होने के बाद अब अगली जंग अच्छे आईआईटी में अच्छी इंजीनियरिंग ब्रांच के लिए होने जा रही है। हर आईआईटी की अपनी अलग ब्रांच की अलग पहचान है। इसमें अभ्यर्थियों की डिमांड में सबसे ज्यादा आईआईटी दिल्ली, बांबे, कानपुर और खड़गपुर होता है। इन सभी जगहों पर शुरुआती रैंक पर ही अच्छी ब्रांच अलॉट हो जाती है।
आईआईटी में गत वर्षों का ट्रेंड देखें तो कई बातें सामने आती हैं। ओवरऑल ट्रेंडिंग इंजीनियरिंग ब्रांच पर नजर डालें तो पता चलता है कि करीब साढ़े तीन हजार रैंक तक बेहतर ब्रांच में दाखिला मिल सकता है।
आईआईटी बांबे में दाखिला पाना सबसे बड़ी चुनौती है, जबकि आईआईटी दिल्ली, खड़गपुर और कानपुर में भी शुरुआती रैंक वाले छात्रों को ही गत वर्ष दाखिला मिला था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही ट्रेंड रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे ज्यादा मांग वाली चार आईआईटी में दाखिले की राह इतनी आसान नहीं है।
गत वर्ष इतनी रैंक पर यहां मिली थी सीट
आईआईटी बांबे में कंप्यूटर साइंस में गत वर्ष प्रथम रैंक लेने वाला गया था और आखिरी 51 वाला था। आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस 7-98 रैंक तक रहा था। आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ड्यूल डिग्री 99 से 175 पर बंद हो गया था।
आईआईटी मद्रास में कंप्यूटर साइंस 62 से शुरू होकर 147 पर बंद हो गया था। आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस 100 रैंक से खुलकर 207 पर बंद हुआ। आईआईटी खड़गपुर में कंप्यूटर साइंस 180 पर खुला और 305 रैंक पर बंद हो गया था। कंप्यूटर साइंस ड्यूल डिग्री आईआईटी मद्रास में 212 पर खुलकर 340 पर बंद हुआ था।
आईआईटी रुड़की में कंप्यूटर साइंस 314 रैंक से खुलकर 665 रैंक पर बंद हो गया था। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में आईआईटी बांबे में 28-168, मद्रास में 32-459, कानपुर में 40-660, दिल्ली में 37-279, केमिकल इंजीनियरिंग बांबे में 35-640 पर बंद हुआ।
आईआईटी बांबे की एयरो स्पेस इंजीनियरिंग 164 से शुरू होकर 1852 रैंक पर बंद हुआ। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ड्यूल डिग्री इन माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स आईआईटी बांबे में 178-323 पर रहा।
आईआईटी में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस में दाखिला सबसे मुश्किल है। आईआईटी बांबे, दिल्ली, कानपुर, खड़गपुर और रुड़की में इसके लिए सबसे ज्यादा मारामारी होती है।
- डीके मिश्रा, निदेशक, अविरल क्लासेज
होनहारों की पसंद में आईआईटी रुड़की नहीं
जेईई एडवांस में अच्छी रैंक लाने वाले दून के युवाओं को अपने ही प्रदेश में स्थित आईआईटी में दाखिले का कोई क्रेज नहीं है। वह दिल्ली, बांबे, खड़गपुर और कानपुर में दाखिले का सपना संजो रहे हैं।
परीक्षा में 767 रैंक लाने वाले निशांत शर्मा की प्राथमिकता में पहले नंबर पर आईआईटी दिल्ली फिर बांबे और कानपुर हैं। इसी प्रकार 2045 रैंक लाने वाले पारस गुप्ता भी कानपुर और खड़गपुर में दाखिला लेना चाहते हैं। 2357 रैंक लाने वाले कुश गुप्ता आईआईटी दिल्ली में दाखिले का सपना संजोए हैं।
जेईई एडवांस में 4013 रैंक लाने वाले प्रांजल बिष्ट भी दिल्ली, बांबे, कानपुर या खड़गपुर में दाखिला लेना चाहते हैं। सभी होनहारों का इसके पीछे मुख्य तर्क यह भी है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन आईआईटी की अलग पहचान है। कंपनियों में भी यहां का प्लेसमेंट प्राथमिकता में रहता है।
रुड़की में यह कोर्स ज्यादा डिमांड में
आईआईटी रुड़की में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, अर्थक्वेक इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग में सबसे ज्यादा मांग रहती है। भले ही अपने राज्य के होनहारों की प्राथमिकता में रुड़की न हो, लेकिन अन्य राज्यों के तमाम छात्र हर साल यहां बड़ी संख्या में दाखिला लेते हैं।
आईआईटी में वैसे तो सीट का आवंटन रैंक पर निर्भर करता है, लेकिन होनहारों के बीच कुछ आईआईटी ज्यादा डिमांड में होती हैं। इसके पीछे इनकी बेहतर छवि भी कही जा सकती है।
- विपिन बलूनी, एमडी, बलूनी क्लासेज