पहले तो कॉलेजों ने अपनी खाली सीटों को भरने के लिए खुद ही छात्रों को सीट अलॉटमेंट की कॉल करके नियमों को तोड़ा और अब ऑनलाइन काउंसलिंग में छात्रों के फॉरगोटन पासवर्ड के जरिए छेड़छाड़ करते हुए च्वाइस फिलिंग में अपने कॉलेजों के नाम जोड़ने का मामला सामने आया है। छात्रों की शिकायत मिलने पर अब प्रबंधन ने ऑनलाइन काउंसलिंग आवेदन फार्म से फॉरगोटन पासवर्ड का ऑप्शन ही हटा दिया है।
साथ ही ऐसे कॉलेजों को चेतावनी भी जारी कर दी है कि यदि जांच में कोई कॉलेज दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ हैकिंग मामले के तहत कार्रवाई करते हुए एक लाख का जुर्माना व दो साल की कैद भी हो सकती है। आईपी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने पहली बार छात्रों को घर बैठे दाखिला लेने के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग के तहत सीट अलॉटमेंट की सुविधा देने की पहल की थी। हालांकि कुछ कॉलेजों ने टेक्नोलॉजी का गलत प्रयोग करते हुए सुविधा में ही खलल डाल दिया है।
ऑनलाइन काउंसलिंग के आवेदन पत्र में छात्रों को फॉरगोटन पासवर्ड का ऑप्शन दिया गया था। क्योंकि ऑनलाइन काउंसलिंग में भाग लेने के लिए हर छात्रों को अपने नाम, डेट ऑफ बर्थ व सीईटी कोड नंबर के आधार पर ईमेल अकाउंट के तर्ज पर लॉगइन करना था, जोकि पासवर्ड से ही ओपन हो सकता था। हालांकि छात्र यदि लॉगइन करते समय पासवर्ड भूल जाते तो उन्हें दूसरा पासवर्ड उपलब्ध करवाने के लिए फॉरगोटन पासवर्ड का विकल्प भी दिया गया था।
सी फॉरगोटन पासवर्ड का कुछ कॉलेजों ने दुरुपयोग करते हुए छात्रों का लॉगइन करते हुए च्वाइंस फिलिंग में छेड़छाड़ करते हुए अपने कॉलेज के नाम जोड़ दिए (च्वाइस फिलिंग ऑप्शन में छात्रों को डिग्री प्रोग्राम में कोर्स विकल्प के साथ-साथ मनपसंद कॉलेज का ऑप्शन दिया गया था)। कुछ छात्रों को ऑनलाइन काउंसलिंग राउंड में जब कॉलेज अलॉट हुए तो उन्होंने विरोध किया कि हमने तो उक्त कॉलेजों को ऑप्शन में रखा ही नहीं था। जबकि एनआईसी का जवाब था कि छात्रों ने जिन कॉलेजों को च्वाइस फिलिंग में भरा था, वे कॉलेज ही अलॉट किए जा रहे हैं।
छात्रों की इस प्रकार की शिकायतों के कई मामले आने के बाद आईपी यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सर्कुलर 6743 में साफ कर दिया है कि ऑनलाइन काउंसलिंग में छात्रों के लॉगइन में फॉरगोटन पासवर्ड से छेड़छाड़ के मामले सामने आने के चलते अब छात्रों को फॉरगोटन पासवर्ड का ऑप्शन नहीं मिलेगा। क्योंकि फॉरगोटन पासवर्ड ऑप्शन को लॉगइन से हटा दिया गया है।
यदि कोई छात्र को पासवर्ड भूल जाता है तो उसे विश्वविद्यालय प्रबंधन को ईमेल के माध्यम से जानकारी देनी होगी। उसी के आधार पर नया पासवर्ड दिया जाएगा। हालांकि जिन छात्रों ने स्पेशल ऑनलाइन काउंसलिंग के राउंड में भाग लिया है,उन्हें सलाह दी जाती है कि एक बार वे अपने च्वाइस फिलिंग के ऑप्शन में जाकर कॉलेजों के नाम अवश्य जांच लें, ताकि यदि छेड़छाड़ हुई होगी तो उसे दुरुस्त किया जा सके।