‘भारत को वैज्ञानिक सोच किसी से लेने की जरूरत नहीं, हम तो पैदाइशी वैज्ञानिक हैं।’ वैज्ञानिक और यूपीटीयू के वीसी डॉ. आरके खांडल गुरुवार को गुरु खांडल की भूमिका में दिखे।
वैज्ञानिक सोच के साथ बेहतर सेहत और ज्यादा से ज्यादा जानकारी खुद के पास इकट्ठा करने की सीख वे बच्चों को हल्के-फुल्के मूड में देते रहे।
उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी बातों में नहीं, छोटी-छोटी घटनाओं में विज्ञान के रहस्य खोजें। यह मौका गुरुवार को रीजनल साइंस सिटी में आयोजित छठे साइंस एक्सपो के उद्घाटन कार्यक्रम में मिला।
डॉ. आरके खांडल, यूपी काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूपी सीएसटी) के निदेशक डॉ. एमजेके सिद्दीकी और राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र के निदेशक डी. रामा सरमा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि डॉ. खांडल ने कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए की। उन्होंने बताया कि बापू कहते थे कि वैज्ञानिकों को यह जान लेना चाहिए कि समाज उनके शोधों के प्रतिफल का इंतजार कर रहा है, जो उनके जीवन के लिए हितकर हो सकते हैं।
वहीं, बच्चों से रूबरू हुए डॉ. खांडल ने कई सीख दीं। उनका कहना था कि बड़ी-बड़ी बातें नहीं छोटी-छोटी चीजों में विज्ञान देखो। अपने आसपास घटने वाली चीजों को देखने पर पता चलेगा कि हम तो पैदाइशी वैज्ञानिक हैं।
हमारे पूर्वजों ने विज्ञान के बड़े शोध हमें दिए। बस उनके लिए नोबल पुरस्कार नहीं मिल सका। कुछ शोध के बारे में उन्होंने बताया कि बेस्ट करेंसी, स्याही हमने ईजाद की।
देश में ग्वार सबसे ज्यादा होता है। ग्वार यानी गौ का आहार भारत में ही पैदा हुआ। ऐसे ही न जाने कितने वैज्ञानिक तथ्य हमारे यहां भरे पड़े हैं।
खाने में छौंक लगाने से लेकर भोजन से पहले प्रार्थना तक ढेरों उदाहरण भारतीय वैज्ञानिक सोच बताते हैं। कार्यक्रम में आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. सीएस नौटियाल, सदस्य डॉ. पीके श्रीवास्तव, डॉ. सीएम नौटियाल, डॉ. आनंद अखीला, डॉ. एसएम प्रसाद मौजूद रहे।