उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यूटीईटी द्वितीय 2013 की परीक्षा के लिए स्नातक में 45 प्रतिशत की शर्त को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही इससे कम अंक प्राप्त अभ्यर्थियों को टीईटी द्वितीय में बैठने के लिए अर्ह करार दिया है।
एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई
न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर निवासी रवि कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने टीईटी द्वितीय के लिए उनके आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया था कि उनके स्नातक में 45 प्रतिशत से कम अंक हैं।
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याचियों का कहना था कि पूर्व में बलदेव सिंह के मामले में न्यूनतम अंक की बाध्यता को समाप्त किया जा चुका है और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की इस मामले में दायर स्पेशल अपील भी खारिज हो चुकी है।
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इस प्रकरण में बोर्ड का कहना था कि हाईकोर्ट की ओर से पूर्व में पारित निर्णय केवल टीईटी प्रथम (प्राथमिक विद्यालय) के लिए ही प्रभावी है उसे टीईटी द्वितीय (जूनियर हाईस्कूल) पर लागू नहीं किया जा सकता है।
45 प्रतिशत की शर्त खत्म
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यूटीईटी द्वितीय 2013 की परीक्षा के लिए स्नातक में 45 प्रतिशत की शर्त को निरस्त करते हुए कम अंक प्राप्त अभ्यर्थियों को टीईटी द्वितीय में बैठने के लिए अर्ह करार किया है। वहीं इस संबंध में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव डीके मथेला का कहना है कि मंगलवार को टीईटी जरूर होगी।
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