रिसर्च स्तर को उच्च क्वालिटी का बनाने के लिए अब नार्थ रीजन के टॉप 16 रिसर्च और एजूकेशनल इंस्टीट्यूट मिलकर काम करेंगे। इस प्रोजेक्ट में पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई को भी शामिल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के तहत सभी रिसर्च सेंटर और एजूकेशनल इंस्टीट्यूट अब पीएचडी और अन्य शोध वर्क के लिए मिलकर कॉमन प्री-पीएचडी कोर्स वर्क शुरू करेंगे। आगामी सत्र से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी।
गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा अब पीएचडी कोर्स के लिए प्री-पीएचडी कोर्स को अनिवार्य कर दिया गया है।
कॉमन प्री-पीएचडी कोर्स वर्क करवाने का फैसला रविवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में द चंडीगढ़ रीजनल इनोवेशन एंड नॉलेज कलस्टर (सीआरआईकेसी) की वार्षिक मीटिंग में लिया गया।
पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने मीटिंग की अध्यक्षता की। बैठक में पीयू कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर, पीजीआई के डा. योगेश चावला, आईआईएसईआर मोहाली डायरेक्टर प्रो. एन नारायणमूर्ति, आईएनटीएस के प्रो. एके गांगुली, एनआईटीटीटीआर डायरेक्टर डा. एमपी पूनिया के अलावा प्रो. मनमोहन सिंह और प्रो. रुपिंदर तिवारी ने भी शिरकत की।
रविवार को नेशनल टेक्नोलॉजी डे के मौके पर पीजीआई डायरेक्टर डा. अमोल गुप्ता को पद्मश्री मिलने पर बैठक में विशेष तौर पर सम्मानित भी किया गया।
बैठक में युवाओं को रिसर्च के प्रति जागरूक करने के लिए डीएसटी-सीआईआई की ओर से मिलने वाली प्रधानमंत्री फैलोशिप स्कीम को ओर बेहतर तरीके से प्रचारित करने पर भी फैला हुआ। नार्थ रीजन के एजूकेशनल और रिसर्च सेंटर में क्वालिटी लाने के लिए 2013 में सीआरआईकेसी का गठन किया गया था।