प्राविधिक शिक्षा विभाग ने अनुदानित व निजी शिक्षण संस्थाओं में नियम विरुद्ध दाखिला पाए 2585 छात्रों को बड़ी राहत दी है।
शासन ने प्रवेश के लिए हाईस्कूल में निर्धारित 50 प्रतिशत अंकों की सीमा को शिथिल कम कर 35 प्रतिशत कर दिया है। इससे इन छात्रों के प्रवेश और परीक्षा संबंधी दिक्कतें दूर हो गई है।
प्रदेश सरकार ने काउंसिलिंग के बाद निजी व अनुदानित संस्थाओं (डिप्लोमा सेक्टर) में रिक्त रह गई सीटों पर सीधे प्रवेश के लिए 18 अक्टूबर 2012 को एक शासनादेश जारी किया था।
इसमें हाईस्कूल परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश के लिए अर्ह मानने की व्यवस्था थी। अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 45 प्रतिशत अंक पाना जरूरी था।
शासनादेश जारी होने के पहले कई निजी संस्थाओं ने हाईस्कूल परीक्षा में 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले छात्रों का प्रवेश ले लिया था।
संस्थाओं ने एआईसीटीई द्वारा प्रवेश के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक निर्धारित किए जाने का हवाला देकर प्रवेश लिया था।
इधर 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रवेश की मान्यता व परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुपालन में छात्रों को प्रथम वर्ष की परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई थी। इसके बावजूद छात्रों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था।
शासन ने ऐसे छात्रों के अनिश्चित भविष्य का हवाला देते हुए प्रवेश को वैध मानने के लिए 18 अक्टूबर 2012 के शासनादेश को शिथिल कर दिया है।
अब नए शासनादेश में हाईस्कूल में 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अर्ह मानने की व्यवस्था कर दी गई है।