रुड़की आईआईटी सीनेट की बैठक में 73 छात्रों को कम सीजीपीए के चलते बाहर निकाले जाने का फैसला सुनाने के दूसरे दिन संस्थान प्रशासन ने इन छात्रों को कुछ राहत देने के संकेत दिए हैं। अभिभावकों के दबाव के बाद अब संस्थान सीनेट की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक बुलाकर इस पर पुनर्विचार की करेगा। शुक्रवार को होने वाली इस बैठक में छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
आईआईटी रुड़की में आयोजित सीनेट की बैठक में बुधवार को 73 छात्रों को प्रथम वर्ष के दो सेमेस्टर में औसत पांच सीजीपीए से कम अंक लाने पर बाहर निकाले जाने का निर्णय लिया गया था।
इसके बाद से यहां मौजूद छात्रों के अभिभावक संस्थान निदेशक सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सामने छात्रों को एक और मौका दिए जाने और निर्णय पर पुनर्विचार की गुहार लगा रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी दिनभर संस्थान के मुख्य भवन में अभिभावकों की गहमागहमी रही।
2013 में आई थी 12 छात्रों की मर्सी अपील
इस पर संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने उपनिदेशक प्रो. विनोद कुमार, डीन एकेडमिक प्रो. प्रमोद अग्रवाल और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डीके नौडियाल के साथ बैठक की। बैठक समाप्त होने के बाद प्रो. नौडियाल ने बताया कि अभिभावकों की अपील के बाद छात्रों के मामले में पुनर्विचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में समस्त विभागों के हेड और डीन शामिल होंगे। संस्थान के उपनिदेशक प्रोफेसर विनोद कुमार ने बताया कि 10 जुलाई (आज) को बैठक बुलाई गई है।
इससे पहले भी संस्थान में कम सीजीपीए के छात्रों को बाहर निकालने की नौबत आ चुकी है। 2013 में ऐसे 12 छात्रों को नोटिस दिया गया था। लेकिन छात्रों की ओर से दी गई मर्सी अपील के आधार पर उन्हें एक मौका दे दिया गया था।
पहले भी दिया गया था छात्रों को मौका
डीन प्रो. डीके नौडियाल ने बताया कि मौका देने के बाद भी इनमें से एक दो छात्र ही बेहतर कर पाए। यही नहीं इससे पहले भी कई ऐसे मामले हुए जिनमें छात्रों की पहले साल में ही बैक आई थी।
यह देखने में आया कि ऐसे छात्र की बैकलॉग पहले साल से लेकर पांचवें साल तक चलती रही और आखिरकार उन्हें छठे साल में बिना डिग्री दिए संस्थान से बाहर निकालना पड़ा।
ऐसे में विगत वर्ष यह नियम लागू किया गया कि जिन छात्रों के पहले दो सेमेस्टर में पांच सीजीपीए से कम अंक होंगे उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा।