आईआईटी रुड़की द्वारा सीनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के 48 घंटे बाद सीनेट की एक्जीक्यूटिव कमेटी के फैसले ने 73 छात्रों का सपना चकनाचूर कर दिया। आईआईटी ने इन सभी छात्रों को संस्थान से बाहर निकालने के फैसले पर ही अपनी अंतिम मुहर लगा दी।
पूरे दिन की जद्दोजहद के बाद देर रात में जब यह फैसला आया तो जेम्स थॉमसन भवन के बाहर खड़े अभिभावकों को गहरा धक्का लगा।
रात आठ बजे बैठक समाप्त होने के बाद संस्थान निदेशक एवं कुलसचिव सहित डीन एवं फैकल्टी फैसला सुनने के लिए बेताबी से इंतजार कर रहे अभिभावकों से मिले बगैर चले गए। जिस पर अभिभावकों का गुस्सा भड़क। अभिभावकों ने इसे संस्थान की छात्रों के प्रति निष्ठुरता बताते हुए फैसले को गलत करार दिया।
यह था मामला
आईआईटी के प्रथम वर्ष के दो सेमेस्टर में औसत पांच सीजीपीए से कम लाने वाले 73 छात्रों को बाहर निकाले जाने का नोटिस जारी किया था। जिसके बाद छात्रों की ओर से विगत 22 जून को मर्सी अपील दी गई थी।
इस पर संस्थान की ओर से आठ जुलाई को सीनेट की बैठक बुलाई गई। जिसमें विचार के बाद इन छात्रों को संस्थान से बाहर निकालने का फैसला सुनाया गया। इसके बाद अभिभावकों के दबाव के चलते निर्णय पर पुनर्विचार के लिए शुक्रवार को एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक बुलाई गई।