लखनऊ विवि में स्नातक फर्स्ट ईयर और परास्नातक में फर्स्ट सेमेस्टर में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट को जल्द ही आईकार्ड मिलेगा।
अभी तक डीटीपी सेल और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के बीच आईकार्ड बनाने के लिए डाटा उपलब्ध करवाने को लेकर मतभेद था।
डीटीपी सेक्शन के इंचार्ज प्रो. राजीव पांडेय का कहना था कि उन्हें जो डाटा दिया जा रहा है वह सत्यापित नहीं है। उसमें फोटो पिन से लगाई गई है और इससे आईकार्ड बनाने में गड़बड़ी हो सकती है।
वहीं प्रवेश समन्वयक प्रो. एनके खरे का कहना था कि डाटा एनआईसी का है और जो फॉर्म दिए जा रहे हैं वह काउंसलिंग के समय विभिन्न विभागों के हेड या फिर डीन द्वारा सत्यापित किए गए हैं।
मामले के हल के लिए कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने विवि के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय को जिम्मेदारी सौंपी थी। मंगलवार को उन्होंने कमेटी के साथ बैठक कर इसका हल निकाल लिया।
प्रो. एनके पांडेय ने कहा कि विवि प्रशासन अब विभागाध्यक्ष व डीन द्वारा सत्यापित कर डीटीपी सेल को भेजे गए फॉर्मों से ही आईकार्ड बनाएगा।
इसके लिए एसक्यूएल सर्वर 2012 और फोटो कनवर्टर सॉफ्टवेयर खरीदा जाएगा। इससे डाटा के सत्यापन में और आसानी होगी।
विवि प्रशासन फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट को हफ्तेभर के भीतर आईकार्ड उपलब्ध करवा देगा। अभी तक यूनिवर्सिटी में एसक्यूएल सर्वर 2001-02 का प्रयोग किया जा रहा है जो कि अपडेट नहीं है।
मालूम हो कि थर्ड ईयर व सेकेंड ईयर के स्टूडेंट के आईकार्ड बनकर तैयार हो गए हैं और उन्हें विभागों में वितरण के लिए भी पहुंचाया जा रहा है। जबकि शैक्षिक सत्र शुरू होने के तीन महीने बाद भी फर्स्ट ईयर के छात्रों को आईकार्ड नहीं मिल पाया है।