हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एससीए ने सोमवार को कुलपति एडीएन वाजपेयी के खिलाफ अपनी याचिका राज्यपाल को सौंप दी है। इसमें कुलपति की शिकायत की गई है।
इसमें कहा गया है कि कुलपति ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई एससीए को तानाशाही तरीके से भंग कर दिया है। साथ ही एससीए ने विश्वविद्यालय में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी राज्यपाल को अवगत करवाया है।
एससीए सचिव पीयूष सेवल और सहसचिव मोनिका का कहना है कि कुलपति ने तानाशाही पूर्ण रवैये के चलते बिना किसी जांच और नोटिस के एससीए भंग कर दी गई। इसके अलावा विश्वविद्यालय में आरएसएस के कार्यकर्त्ताओं को तैनाती और पदोन्नति दी गई।
कुलपति पर लगाए हैं कई गंभीर आरोप
एससीए का कहना है कि बिना सुविधाएं बढ़ाए विश्वविद्यालय में फीसें बढ़ा कर छात्रों पर बोझ बढ़ाया गया है। कुलपति की लचर कार्यप्रणाली के चलते विश्वविद्यालय को आवश्यक अनुदान तक नहीं मिल पाया।
परीक्षाओं के समय लाइब्रेरी के समय में कटौती और हास्टल बंद करने के निणर्य से छात्र समुदाय के लिए समस्याएं खड़ी की गई। पैसों के लालच में बिना किसी ढांचागत तैयारियों के रूसा लागू कर दिया गया। विजन 20-20 के नाम पर विश्वविद्यालय के निजीकरण का प्रयास किया गया।
पीयूष सेवल ने बताया कि ‘वीसी हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ के तहत पहले चरण में राज्यपाल को एससीए ने याचिका सौंप कुलपति की असलियत से अवगत करवाया है। दूसरे चरण में आंकड़ों और तथ्यों के साथ राज्यपाल को कुलपति के खिलाफ चार्जशीट सौंपी जाएगी।